पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष तथा रियासत के समाज कल्याण मंत्री के विधानसभा सत्र से पहले कार्यभार ग्रहण करने के लिए भाजपा पर दबाव बढ़ा है। पीडीपी और भाजपा दोनों का मानना है कि यदि 25 मई से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने मंत्री पद नहीं संभाला तो सदन में किरकिरी होना तय है।
बताते हैं कि इससे बचने के लिए न केवल भाजपा अपने कोटे के मंत्री को मनाने में युद्धस्तर पर जुटी है, बल्कि सहयोगी पार्टी पीडीपी की ओर से भी इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सत्ता के गलियारे से खबर है कि सज्जाद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का कार्यभार मिलने की जिद पर अड़े हुए हैं।
सूत्रों का कहना है कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी सज्जाद के पदभार संभालने के मुद्दे पर भाजपा पर दबाव बढ़ाया है। वह इस मुद्दे पर स्थानीय से केंद्रीय नेतृत्व तक बात कर चुकी हैं और उन्हें सज्जाद के विधानसभा सत्र से पहले पदभार न संभालने के खतरे बता चुकी हैं।
दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व ने भी सज्जाद की मानमनौव्वल की है
महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
सज्जाद लोन से भाजपा के राज्य स्तरीय नेता कई बार बात कर चुके हैं। विधानमंडल दल के नेता ने भी इस बाबत सज्जाद से बात की है। भाजपा की ओर से कुछ पहाड़ी नेताओं को भी उन्हें मनाने के काम में लगाया गया है।
सूत्रों का दावा है कि हाल ही में भाजपा की स्थानीय कमेटी से मिली रिपोर्ट के बाद दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व ने भी सज्जाद की मानमनौव्वल की है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि असल समस्या दो लोगों को मनाने की है। सज्जाद के साथ ही अब तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वतंत्र कार्यभार संभाल रहे किश्तवाड़ के विधायक सुनील शर्मा को मनाने में भी मेहनत करनी पड़ रही है।
पार्टी ने सुनील को आश्वस्त किया है कि वह निकट भविष्य में इसकी किसी न किसी रूप में भरपाई करने की कोशिश करेगी। इस संबंध में भाजपा विधानमंडल दल के नेता तथा उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह का मानना है कि सब ठीक हो गया है। बहुत जल्द सज्जाद लोन मंत्रिमंडल के सहयोगी के रूप में दिखेंगे।
... तो इसलिए भाजपा छोड़ नहीं चाहती
महबूबा मुफ्ती और अमित शाह
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भाजपा सज्जाद लोन का साथ किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहती है। इसके पीछे कारण यह बताया जाता है कि उनके बल पर ही भगवा खेमा कश्मीर में अपनी दमदार मौजूदगी दिखाने में कामयाब होती रही है।
मोदी की दो सफल रैलियों के पीछे भी सज्जाद का ही हाथ बताया जाता है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव से पहले सज्जाद ने मुलाकात के बाद जिस तरह से मोदी के तारीफों के पुल बांधे थे, उससे न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर, बल्कि देश में भी विरोधियों को मोदी के मुस्लिम विरोधी चेहरे को साफ दिखाने में मदद मिली। बताते हैं कि मोदी भी नहीं चाहते कि सज्जाद भाजपा से रूठें।