भारत-पाक नियंत्रण रेखा की अग्रिम चौकी से। सेना की पेट्रोलिंग पार्टी जिप्सी जैसी ही अग्रिम चौकी के पास पहुंचती है, एक अलर्ट सायरन बजने लगता है।
कमांडिग अफसर खुद ड्राइव कर हमें इस चौकी तक ले गए थे। यह एक आधुनिक उपकरण है जो किसी भी हरकत पर विशेष आवाज से हमारी सेना के जवानों को चौकन्ना करता है।
कोई बिल्ली भी इसके जद में आ गई तो यह अपना काम करने लगता है। लिहाजा जवानों को रात भर चौकन्ना रहकर देखना पड़ता है कि सायरन के बजने का कारण कोई जंगली जानवर है या कोई दुश्मन।
रात के नौ बजे हैं और अपने ठहराव स्थल से अग्रिम चौकी तक जाने को हमारी टीम को एक संकरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ा। पक्की सड़क दूर कहीं छूट गई है और आगे जंगल के बीच ऊबड़-खाबड़ रास्ता है।
वाहन की हेडलाइट भी बुझा दी गई है ताकि दुश्मन को इस पेट्रोलिंग का पता नहीं चले। एक छोटी लाइट वाहन के आगे जल रही है जो धुंध भरे रास्ते में सिर्फ थोड़ी दूर तक ही रास्ता दिखाती है।
तकरीबन ढ़ाई किलोमीटर तक हम इसी रास्ते पर चलते हैं। हमारे अलग-बगल सेना के हथियारी धारी जवान हैं। हम दूसरी अग्रिम चौकी पर पहुंचते हैं।
सामने नदी बह रही है। उस पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है और उसकी अग्रिम चौकियों पर पाक रेंजर्स तैनात हैं। लकड़ी और बांस के फट्टों से बनी सीढ़ी हमें मचान तक पहुंचाती है।
यहां दो जवान आधुनिक उपकरण से उस पार की हरकतों पर नजर रखे हुए हैं। हमारी सेना के पास अब आधुनिक उपकरण हैं जिससे सविंलांस की जाती है।
उपकरण के सहारे स्क्रीन पर उस पार की हर हरकत देखी जा सकती है। ये फ्रांस और इजरायल के बने उपकरण हैं जो हमारी सेना को मजबूती दे रहे हैं।
इस उपकरण से दुश्मन पर नजर रखना आसान हो गया है। इस चौकी के आगे और अगल-बगल में कुछ-कुछ दूरियों और ऊंचाइयों पर हमारे जवान तैनात हैं।
कुछ साल पहले इस इलाके से आतंकियों की घुसपैठ की कई घटनाएं हुईं थीं। नतीजतन अब नदी के इस पार सेना माइंस भी बिछा रखा है। नदी ने जब अपनी धारा बदली तो हमारी चौकियों तक रेत आ गई थी।
अब फिर से माइंस बिछा कर दुश्मन को रोकने का पुख्ता इंतजाम किया गया है। रेत के बाद अब नई अग्रिम चौकियां बन गई हैं।
एक बंकर में छह जवान। रात भर जागकर पहरा देते हैं जवान। फिर चार जवान आराम करते हैं तब भी पहले से ड्यूटी दे रहे दो जवानों को स्टैंडिंग ड्यूटी में बने रहना पड़ता है। नाइट पेट्रोलिंग ड्यूटी के जवानों की मुस्तैदी पूरी रात बनी रहती है।
साथ में रहते हैं आधुनिक हथियार और सबसे बड़ा साथ होता है आत्मविश्वास का। इन बेखौफ जवानों की अथक चौकन्नेपन ने ही आतंकियों की घुसपैठ को संभावना को न्यून किया है।