लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, आतंकियों ने अपनी हरकतें तेज कर दी हैं। दो दिनों में तीन हमले कर आतंकियों ने अपने मंसूबे जाहिर कर दिए हैं। इसलिए चुनाव पूर्ण हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है।
इसी बीच, सुरक्षा बलों ने भी मुस्तैदी बढ़ा दी है और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। हाल के हमलों में भी ही सभी हमलावर आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया हो, लेकिन दो पुलिस कर्मियों के शहीद होने नुकसान जरूर हुआ है।
कश्मीर घाटी में बंदूक के साए में होने जा रहे लोकसभा चुनावों में हिंसा जोर पकड़ चुकी है। सीमा पार बैठे आकाओं से मिले नए निर्देशों को अमलीजामा पहनाने का काम आतंकियों ने तेजी से शुरू कर दिया है।
पिछले कुछ दिनों में आतंकी इसमें सफल भी हुए हैं। वहीं, राजनेताओं करना भी आतंकियों की प्राथमिकता में है। रविवार के बाद अब तक नेकां नेताओं पर हमले के ऐसे दो असफल प्रयास हो चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को चार आतंकियों के ढेर होने पर हालांकि, कुछ संतोष जरूर है, लेकिन एजेंसियां बेहद सक्रिय हैं। एक अधिकारी का कहना है कि ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए सुरक्षा बलों को आक्रामक रुख अपनाने के लिए कहा गया है।
सीमा पार बैठे आकाओं ने लश्कर-ए-तोयबा के आतंकियों को खूनखराबा करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें हिजबुल मुजाहिदीन और अन्य आतंकी संगठन भी कूद पड़े हैं, लेकिन हम इसे कामयाब नहीं होने देंगे।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक नालिन प्रभात बताते हैं कि पिछले साल जून में प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी के कश्मीर दौरे से पूर्व हैदरपोरा में सेना पर हमला करने वाले आतंकियों के खिलाफ हमने उसी वक्त कार्रवाई शुरू की दी थी।
हमले में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बल मारने में सफल रहे थे, लेकिन मास्टर माइंड अबु कासिम अभी जिंदा है। उन्होंने कहा कि हम कश्मीर घाटी में शांतिपूर्ण चुनाव कराने में पूरी तरह सफल होंगे। यह हमारा दावा भी है।