पोलिंग बूथों से लौटे कुछ सरकारी कर्मचारियों ने रविवार को आईटीआई किश्तवाड़ के स्ट्रांग रूम के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव में ड्यूटी के दौरान उन्हें कुप्रबंधन का शिकार होना पड़ा।
खाने से लेकर रहने तक का बंदोबस्त उनको खुद करना पड़ा, जबकि उनको पोलिंग स्टेशनों पर दस दिन पहले ही भेज दिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी आवाज दबाने के लिए एसएचओ दच्छन ने उन पर लाठीचार्ज भी किया।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षक संघ के जिला प्रधान महबूब अहमद काजी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन से अपील की कि मढ़वा, वाड़वन, दच्छन और पाडर में चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए सरकारी कर्मचारियों को हेलीकाप्टर से वापस लाया जाए।
प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब कुछ कर्मचारियों को, जिनमें दच्छन भेजे गए प्रेजाइडिंग और एक पोलिंग अधिकारी को हेलीकाप्टर से वोटिंग मशीन सहित किश्तवाड़ लाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनको 10 और 13 अप्रैल को ड्यूटी पर भेजा गया था।
कुछ पोलिंग पार्टियों को चॉपर से पोलिंग स्टेशनों तक पहुंचाया गया, लेकिन मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के बाद उनकी वापसी का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया और उनको ऊपर वाले के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनको ड्यूटी पर तो भेजा गया, लेकिन उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि थाना प्रभारी दच्छन के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सभी कर्मचारियों को किश्तवाड़ हेलीकाप्टर से पहुंचाया जाए।
प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए पुलिस अधिकारियों के अलावा अन्य अधिकारी पहुंचे और कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि बाकी कर्मचारियों को भी लाया जाएगा। उसी समय मढ़वा से कुछ कर्मचारियों को हेलीकाप्टर से पहुंचाया, जिसके बाद ही प्रदर्शन समाप्त हुआ।
शाम के समय एक प्रतिनिधिमंडल भी जिला उपायुक्त से मिला और घटना की जानकारी दी और मांग की कि इसकी जांच होनी चाहिए। इस दौरान राजेश परिहार, प्रदीप कोल, तनवीर मलिक और कई शिक्षक व अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। धरने के चलते करीब दो घंटे तक मार्ग पर आवाजाही बाधित रही।