श्रीनगर संसदीय सीट पर केंद्रीय मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला नेकां-कांग्रेस के साझे उम्मीदवार हैं। यहां से तारिक अहमद करा को पीडीपी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वे फारूक को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
चुनाव प्रचार ने अभी जोर नहीं पकड़ा है, लेकिन नेकां तथा पीडीपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रीनगर में डेरा जमा लिया है। इस सीट पर सातवें चरण के तहत 30 अप्रैल को मतदान होगा।
श्रीनगर, गांदरबल तथा बडगाम जिलों को मिलाकर बनाई गई इस संसदीय सीट पर अब तक नेकां अपना वर्चस्व बनाए रखने में सफल होती रही है। इस सीट अब तक हुए दस चुनावों में उसके उम्मीदवार 8 बार विजय का परचम लहराने में सफल रहे हैं।
नेकां के वर्तमान सांसद तथा पार्टी अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला दो बार तथा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तीन बार यहां का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
यहां से वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला 1980 में निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस बार परिस्थितियां कुछ बदली हुई नजर आ रही हैं। श्रीनगर संसदीय सीट के लिए पीडीपी ने पूरी ताकत झोंक दी है।
कोई खास आधार न होने के बावजूद भाजपा तथा आम आदमी पार्टी भी नेकां के रास्ते में थोड़ी-बहुत रुकावट डालेंगे, जिसका लाभ भी पीडीपी को ही मिलेगा।
नेकां के लिए पार्टी के भीतर उठ रहा विरोध भी उसके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। अपने ही उसके लिए परेशानी पैदा करने लगे हैं।
एक वरिष्ठ नेता मंगलवार को पार्टी छोड़कर निर्दलीय के तौर पर चुनावी मैदान में उतरने की धमकी दे चुके हैं।
हालांकि इस सीट के लिए चुनाव प्रचार ने अभी जोर नहीं पकड़ा है, लेकिन नेकां तथा पीडीपी के नेता कई दिनों से श्रीनगर में डेरा जमाए बैठे हैं। इस सीट पर सातवें चरण के तहत 30 अप्रैल को मतदान होना है।