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फर्श पर प्रसव मामले में अस्पताल स्टाफ की लापरवाही सामने आई

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कठुआ/बनी। उपजिला अस्पताल बनी पहुंचकर भी बिना डाक्टरी मदद के कड़ाके की सर्दी में फर्श पर ही प्रसव के मामले में डाक्टर समेत स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। विभाग के उच्च अधिकारियों की मानें तो जांच में सामने आया है कि लापरवाही तो हुई ही है, ऐसे में ड्यूटी पर तैनात डाक्टर समेत स्टाफ पर गाज गिरना तय है।
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मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रधान सचिव ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दो दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसी के चलते वीरवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अशोक चौधरी उपजिला अस्पताल बनी पहुंचे और जांच को आगे बढ़ाया। एक ओर जहां उपजिला अस्पताल में उस दिन तैनात स्टाफ से पूछताछ की गई, वहीं प्रसव करवाने के लिए पहुंची महिला नैनो देवी के पति मान सिंह और भाई के बयान भी दर्ज किए गए।
डाक्टर समेत छह स्वास्थ्य कर्मी नाइट ड्यूटी पर थे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उस दिन डाक्टर समेत छह स्वास्थ्य कर्मी नाइट ड्यूटी पर थे। जांच में सामने आया है कि अस्पताल परिसर से सटे क्वार्टर में सभी स्टाफ सदस्य मौजूद थे। अस्पताल के भीतर हालांकि नाइट ड्यूटी डाक्टर के रुकने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अब निर्देश दिए गए हैं कि कम से कम एक स्टाफ सदस्य चौबीस घंटे अस्पताल के वार्ड और अन्य कमरों में उपलब्ध रहेगा।
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पति को नहीं पता था कि स्टाफ कहां रुकता है
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मान सिंह से बातचीत में पता चला है कि उसे यह नहीं मालूम था कि नाइट ड्यूटी स्टाफ कहां रुकता है, लेकिन अस्पताल में मरीजों की देखरेख करना और रूटीन में वार्ड का दौरा किया जाना जरूरी था। स्टाफ की तरफ से लापरवाही तो की ही गई है। उन्होंने बताया कि मामले की रिपोर्ट बनाकर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को सौंपी जाएगी।

महिला रोग विशेषज्ञ है नहीं, मात्र दो डाक्टर हैं तैनात
बनी उपजिला अस्पताल में मात्र दो मेडिकल अधिकारी तैनात हैं। अस्पताल में कोई महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो एक दर्जन से अधिक पद लंबे अर्से से रिक्त हैं। ऐसा तब है जब बनी उपजिला अस्पताल के बाद लोग जैसे तैसे सात से आठ घंटे का सफर कर जिला अस्पताल कठुआ पहुंचते हैं, इस उम्मीद में कि यहां उन्हें बेहतर उपचार मिलेगा, लेकिन यहां भी सत्तर से अस्सी फीसदी मामलों को जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया जाता है। लगभग दो सौ किलोमीटर तक लोगों के पास स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाओं का भारी टोटा है। जिला अस्पताल को छोड़कर जिले के पहाड़ी इलाकों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं है।
क्या था मामला
सोमवार को प्रसव के लिए पहुंची नैनो देवी निवासी बरमोता ने अस्पताल के किसी भी स्टाफ के दो घंटे तक नहीं मिलने के बाद फर्श पर बच्चे को जन्म दिया था। रात करीब तीन बजे प्रसव पीड़ा के बाद उसे यहां लाया गया था। पति मान सिंह ने बताया था कि लगभग दो घंटे तक उपजिला अस्पताल के अलग अलग कमरों को खंगालते रहे। कहीं बंद शटर थपथपाया तो कहीं लोगों से पूछा, लेकिन कोई भी स्टाफ उनकी सुध लेने नहीं आया। सुबह करीब पांच बजे कड़ाके की सर्दी में नैनो ने फर्श पर बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद आननफानन में अस्पताल स्टाफ पहुंचा और महिला और बच्चे को संभालने लगा। मान सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि मामला बढ़ता देख स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों ने मान सिंह से अंग्रेजी में एक स्पष्टीकरण पर भी हस्ताक्षर करवाए थे। हालांकि, मान सिंह के अनुसार उसे यह बताया गया कि यह हस्ताक्षर प्रसव के बाद उचित उपचार मिलने के बारे में करवाए गए थे। स्थानीय विधायक ने भी मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दो दिन के भीतर मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
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