हीरानगर। जिले के कंडी इलाके में पानी की बड़ी किल्लत है। फसलों की सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिलता है। कंडी क्षेत्र को हराभरा करने की सरकारी योजनाएं और प्रोजेक्ट हवा में हैं। प्राकृतिक जलस्रोत खत्म हो रहे हैं। हालांकि पानी की किल्लत से निपटने के लिए लोगों ने अब प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण पर ध्यान देन शुरू कर दिया है। लोगों ने पुराने जल स्रोत बचाने के लिए सरकार से कंडी क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग की है।
सल्लन निवासी नितिन शर्मा, पक्का कोठा निवासी रंजीत सिंह, निचला निवासी प्रेम कुमार आदि ने बताया कि कंडी क्षेत्र में न तो सिंचाई के लिए पानी है और न ही पीने के लिए। इस क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए किसी भी सरकार ने गंभीरता से काम नहीं किया। बेहतर होगा अब सरकार तालाबों को बचाने पर गंभीरता दिखाए। कंडी क्षेत्र में कई तालाब हैं। अगर इनका संरक्षण किया जाए तो पूरे क्षेत्र में हरियाली आ सकती है। वन विभाग ने कुछ तालाबों को बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन चंद तालाबों के संरक्षण से पूरी कंडी की समस्या खत्म नहीं होगी।
आधे से अधिक हैंडपंप खराब
स्थानीय लोगों ने बताया कि आधे से अधिक कंडी क्षेत्र में सरकार द्वारा लगाए गए हैंडपंप बंद हैं। ट्यूबवेल भी भरपूर पानी नहीं दे रहे हैं। 21वीं सदी में भी लोग कुएं पर निर्भर हैं।