कठुआ शहर और आसपास के इलाकों में प्रदूषण खतरे की घंटी बजा रहा है। शहर की परिधि से सटकर बने कठुआ औद्योगिक क्षेत्र में सभी नियमों को ताक पर रखकर स्थापित की गई इकाइयां जहर उगल रही हैं। हालत ऐसी हो गई है कि शहर के तारानगर, सावन चक, हटली मोड़, गोविंदसर, खरोट तक के इलाके में इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषण की जहरीली हवा लोगों की जान को आफत में डालने लगी है। दिन ढलने तक इन इलाकों की हवा इतनी प्रदूषित हो जाती है कि लोगों का घरों में बैठना तक मुश्किल हो जाता है। यहां तक की दुपहिया वाहनों पर सफर करने वाले और शाम के समय वॉक पर निकलने वाले लोगों को भी मजबूरन जहरीली हवा निगलनी पड़ रही है। बारिश नहीं होने से हवा में घुल रहे रसायन लोगों को बीमार बना रहे हैं।
इस समय देश की राजधानी दिल्ली में लोग भयंकर प्रदूषण का सामना कर रहे हैं। हालत यह है कि वहां खुली हवा में सांस लेने में भी लोगों को दिक्कत हो रही है। जिस तरह से अनियंत्रित और अवैज्ञानिक विकास हो रहा है, उसके चलते यह परेशानी कई गुना बढ़ गई है। कारखानों द्वारा प्रदूषण रोकने के मानकों का कठुआ जिले में भी भयंकर उल्लंघन हो रहा है। इसलिए यदि प्रशासन ने कुछ सख्त कदम नहीं उठाए तो वह दिन दूर नहीं, जब यहां भी दिल्ली जैसे हालात हो सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो कठुआ शहर के आसपास लिए गए हवा के नमूनों में साफ हुआ है कि प्रदूषण अनुमेय सीमा से दोगुना हो चुका है। सर्दियों की दस्तक के साथ सूखी सर्दी बढ़ने से हवा में प्रदूषण भी लगातार बढ़ा है। सूत्रों की मानें तो न सिर्फ पीएम 10 बल्कि पीएम 2.5 भी अनुमेय सीमा से काफी अधिक बढ़ चुका है। पिछले साल जहां आरएसपीएम या पीएम 10 की मात्रा 138 माइक्रोग्राम के लगभग थी, वहीं अब 200 को छूने लगी है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ा है। प्रदूषण मानकों के अनुसार हवा में आरएसपीएम या पीएम 10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम से कम ही रहनी चाहिए। वहीं एसपीएम जहां 200 माइक्रोग्राम के लगभग रहना चाहिए। पिछले साल जहां यह 270 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया तो इस साल यह आंकड़ा 300 को भी पार करता नजर आ रहा है।
सेहत के आठ खलनायक
पीएम10 (पार्टिकल मैटर)
इनमें शामिल हैं हवा में मौजूद धूल, धुआं, नमी, गंदगी आदि जैसे 10 माइक्रोमीटर तक के पार्टिकल।
पीएम 2.5
2.5 माइक्रोमीटर तक के ये पार्टिकल साइज में बड़े होने की वजह से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
एनओ 2 (नाइट्रोजन ऑक्साइड)
नाइट्रोजन आक्साइड वाहनों के धुंए में पाई जाती है। सांस के रोगियों के लिए खतरनाक। यह अम्लीय वर्षा की वजह बनती है।
एसओ 2 (सल्फरडाई ऑक्साइड)
यह गाड़ियों और कारखानों से निकलने वाले धुंए से निकलकर फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाती है।
सीओ (कार्बन मोनो ऑक्साइड)
यह गाड़ियों से निकलने वाले धुएं में पाई जाती है। यह फेफड़ों को घातक नुकसान पहुंचाती है।
ओ3 (ओजोन)
दमे के मरीजों और बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक।
एनएच3 (अमोनिया)
फेफड़ों और पूरे रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए खतरनाक है।
पीबी (लेड)
गाड़ियों से निकलने वाले धुंए क्रे अलावा मेटल इंडस्ट्री से भी निकलकर यह लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला सबसे खतरनाक मेटल है।
जम्मू शहर के बाद राज्य में सबसे जहरीली कठुआ की हवा
प्रदूषण की समस्या ने देश के 75 बड़े शहरों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। राज्य में भी प्रदूषण का पैमाना लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार जम्मू संभाग जहां राज्य में सबसे अधिक प्रदूषित इलाका है, वहीं राज्य में दूसरा नंबर कठुआ औद्योगिक क्षेत्र और इससे सटे शहर के इलाकों का है। यहां प्रदूषण के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज हो रही है। कठुआ में प्रदूषण मॉडरेट लेवल से बढ़ता जा रहा है और जिस रफ्तार से यह बढ़ रहा है उससे वह दिन दूर नहीं जब यहां की हवा में प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा।