कलीठ फील्ड फायरिंग रेंज को फिर से शुरू करने के लिए सेना फायरिंग रेंज के अधीन के गांवों के ग्रामीणों के सामने बेबस साबित हो रही है। जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह सेना ने करीब सात बजे के कलीठ फायरिंग रेंज पर लगभग 15 मिनट तक छोटे हथियारों से फायरिंग कर अभ्यास किया।
इसके बाद सेना क्षेत्र से गाड़ियां लेकर चली गई, क्योंकि सेना को डर था कि गांव चमारकी के ग्रामीण फायर की आवाज सुनकर रेंज के सामने न आ जाएं। इसके चलते सेना ने फायर करना बंद कर दिया। क्योंकि मंगलवार को भी गांव चमारकी के ग्रामीण कलीठ फील्ड फायरिंग रेंज पर सेना के आने से जमा हो गए थे और जोरदार प्रदर्शन किया था। वहीं दूसरी तरफ सेना के अधिकारी एसडीएम कार्यालय खौड़ में आकर एसडीएम से फायरिंग करने की अनुमति की मांग भी कर रहे हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी लोगों को शांत करने में हमारा सहयोग करें, लेकिन प्रशासन खुद ग्रामीणों के सामने बेबस साबित हो रहा है । इस विषय में एसडीएम का कहना है कि फायरिंग रेंज की वजह से क्षेत्र के लोगों को परेशानी है इसमें कोई दो राय नहीं है। इसलिए ही ग्रामीण मुआवजे की राशि को ठुकरा कर फायरिंग रेंज से छुटकारे की मांग कर रहे हैं । जानकारी के मुताबिक बुधवार को खौड़ स्थित एसडीएम कार्यालय में एक सैन्य अधिकारी ने एसडीएम देवेंद्र पाल भगत से यहां तक कह दिया कि साहब हमें क्लीयरेंस के बारे में लिख कर दो कि हम कलीठ फायरिंग रेंज पर अभ्यास कर सकते हैं या नहीं।