20 से 30 हजार कमाता है प्रति घोड़ा
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पहाड़ी जिलों में घोड़े रखने वाले गुर्जर समुदाय के लोगों ने श्रीनगर की तरफ रुख कर लिया है। राजोरी, पुंछ, रियासी जिलों से मुख्य रूप से घोड़े वाले अमरनाथ यात्रा के लिए जाते हैं। यात्रा के बंदोबस्त में घोड़ों का पचास फीसदी से ज्यादा योगदान रहता है।
दरअसल, यात्रा शुरू होने के दो महीने पहले ही दोनों मार्गों पर काम शुरू हो जाता है। इसमें हर तरह के कार्य में घोड़ों का योगदान रहता है। राजोरी और पुंछ से ही करीब 20 हजार घोड़े यात्रा में शामिल होते हैं। श्राइन बोर्ड ने तो यात्रा को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड का साथ देने के लिए घोड़े वाले भी पहाड़ी जिलों से रुख करने लगे हैं। डेढ़ से दो महीने के बीच यह यात्रा के अलग-अलग रूट पर पहुंच जाते हैं।
मुगल रोड से आसान हुई राह
मुगल रोड खुलने के बाद घोड़े वालों की राह आसान हो गई है। पहले इनको कालाकोट और रियासी से होकर बालटाल और पहलगाम की तरफ पहुंचना होता था, लेकिन अब मुगल रोड से यह लोग 15 से 20 दिन के भीतर ही श्रीनगर और डेढ़ महीने तक यात्रा के दोनों मार्गों तक पहुंच जाते हैं।
20 से 30 हजार कमाता है प्रति घोड़ा
हर एक घोड़ा यात्रा के दौरान 20 से 30 हजार रुपये कमाता है। यात्रा में ढांचा ढोने, लंगर का सामान पहुंचाने, रास्ते बनाने के लिए सामान पहुंचाने आदि में घोड़ों की मदद ली जाती है, जबकि यात्रा शुरू होने के बाद लोग यात्रा करने में इनका इस्तेमाल करते हैं। जानकारी के अनुसार घोड़े वालों की साल भर की कमाई का साधन उनके घोड़े रहते हैं। कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास घोड़ों की संख्या 10 तक है। यह लोग तीन महीने तक यात्रा मार्ग पर रहते हैं।