अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर।
नेशनल कांफ्रेंस ने चेतावनी दी है कि रियासत में जीएसटी को मौजूदा फार्म में किसी भी हालत में लागू नहीं होने दिया जाएगा। नेकां द्वारा जीएसटी पर अधिकृत टीम के सदस्य और जम्मू संभाग के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा का कहना है कि जम्मू कश्मीर में जीएसटी का कनाडा मॉडल लागू करना सबसे बेहतर होगा। कनाडा ने अपने क्यूबेक राज्य राज्य के हितों की रक्षा के लिए समान कर मामले में अलग से समझौता किया है। इसी तरह भारत सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार में समझौता हो सकता है, ताकि रियासत की राजकोषीय स्वायत्तता बरकरार रहे।
राणा ने अमर उजाला से कहा कि रियासत सरकार जीएसटी को मौजूदा फार्म में लागू कर छोटे व्यापारियों को मसलना चाहती है। जीएसटी में आनलाइन रिटर्न भरना होगा, जबकि यहां हालात के कारण इंटरनेट पर प्रतिबंध लगता रहता है। छोटे व्यापारी डिजिटल फ्रेंडली नहीं है, लिहाजा उन्हें अलग से 20 हजार प्रतिमाह पर कोई कंप्यूटर स्टाफ रखना होगा। यह व्यापारियों पर आर्थिक मार है। जीएसटी में इंट्री टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे रियासत को भारी नुकसान होगा।
उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि रियासत सरकार को सिर्फ उत्पाद शुल्क में केंद्र से 1600 करोड़ मिलते हैं। रियासत सरकार ने केंद्र से दो साल की इस राशि के भुगतान के लिए पत्र लिखा है। जीएसटी में इसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। सरकार इसे जम्मू बनाम कश्मीर का झगड़ा बनाना चाहती है, जबकि सच्चाई यह है कि जम्मू और कश्मीर के अलावा लद्दाख तीनों खित्तों को मार झेलनी पड़ेगी। जीएसटी में वैष्णो देवी यात्रियों से लेकर कश्मीर में पर्यटकों तक को 28 प्रतिशत का टैक्स चुकाना पडे़गा। आर्थिक अराजकता फैलने का खतरा है।
राणा ने कहा कि जीएसटी लागू होने पर रियासत के विशेष अधिकार केंद्र को समर्पित हो जाएंगे। रियासत का दर्जा नगर निगम जैसा हो जाएगा और वित्त मंत्री किसी वार्ड के फंड मैनेजर की तरह हो जाएंगे। भाजपा और पीडीपी में भी मतभेद है। रियासत सरकार ने 10 महीनों में कोई तैयारी नहीं की। रियासत सरकार असमंजस में है। जीएसटी से कश्मीर के मेवे पर भारी टैक्स शुरू हो जाएगा। सरकार ने विधायिका का मजाक बनाया। सत्र बुलाकर स्थगित कर दिया।
जीएसटी से संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक हित प्रभावित होंगे। सरकार की तैयारियों इन तीनों मोर्चों पर फेल है। उन्होंने कहा कि पीडीपी अपनी कुर्सी बचाने के लिए केंद्र को जीएसटी लागू करने का भरोसा दे रही है, जबकि रियासत में माहौल कुछ और बन रहा है। संभव है कि यह पीडीपी सरकार की चाल हो। जम्मू कश्मीर के भाजपा नेताओं को भी इस मुद्दे पर सोचना होगा। वह केंद्र की राजनीति प्रधानमंत्री मोदी पर छोड़ें और जम्मू कश्मीर में रियासत की हितों का ध्यान रखें। अगर राज्य हित नहीं रहेगा तो राष्ट्र हित कैसे सुरक्षित हो सकता है।