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पंचायत चुनाव की नई प्रक्रिया पर रोष

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अरनिया।
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पंचायत चुनाव की नई प्रक्रिया से लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों की मांग है कि पंच व सरपंच के चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए एक ही प्रक्रिया अमल में लाई जाए। पंच के जरिए सरपंच का चुनाव होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के पंचायत चुनाव में पंचों द्वारा सरपंच चुनने की प्रक्रिया के निर्णय से अधिकतर गांवों के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से गांवों में भ्रष्टाचार बढ़ेगा और कोई भी सरपंच अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगा। पूर्व सरपंच जगदीश राज, रघुवीर सिंह, नरेश कुमार, प्रकाश चंद, मेलाराम, पूर्ण चंद, बाबू राम, गुरिंदर सिंह ने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के करीब 18 माह बाद गठबंधन सरकार चुनाव तो करा रही है और हम इस का स्वागत भी करते हैं मगर नई व्यवस्था के तहत 73 वें एक्ट को दर किनार करके पंचों द्वारा सरपंचों को चुने जाने से लोगों को काफी आपत्ति है। इससे केंद्र द्वारा पंचायतों को मिलने वाला फंड तो मिलता रहेगा मगर विकास नहीं हो पायेगा। हर पांच-छह माह के बाद पंच किसी एक पंच से मोटी रकम लेकर समर्थन वापस ले लेगा।
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हालांकि नई व्यवस्था के तहत पंचों की अहमियत व कीमत जरूर बढ़ जाएगी मगर लोगों की हालत खराब हो जाएगी। इसके अलावा मतदाता को पता ही नहीं चलेगा कि वो किस सरपंच के लिए मतदान कर रहा है। मात्र पंच का ही पता रहेगा। लोगों का कहना है कि पंचायती चुनाव आपसी भाई चारे का प्रतीक माना जाता है मगर नई व्यवस्था के तहत सरकार पंचायतों को भी भ्रष्टाचार की दल दल में धकेल रही है जो हमें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगा।
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