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जीएमसी को पांच साल से नहीं मिल पाया स्थायी प्रिंसिपल

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जम्मू। मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) की प्रिंसिपल कुर्सी को लेकर कई उतार-चढ़ाव होते रहे हैं। पांच साल से जीएमसी को स्थायी प्रिंसिपल नहीं मिल पाया है। इस वर्ष भी प्रिंसिपल के पद पर अस्थायी नियुक्ति रही। एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस, साइक्रेटरी, सीडी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में प्रिंसिपल एवं डीन की भूमिका अहम रहती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि केबिनेट स्तर पर स्थायी तौर से किसी प्रिंसिपल की तलाश में इतना लंबा इंतजार क्यों किया गया है।
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जीएमसी में जून 2012 तक छाती विशेषज्ञ डा. राजेंद्र सिंह ने स्थायी तौर पर प्रिंसिपल के पद पर अपनी सेवाएं दीं। उनकी सेवानिवृत्ति के साथ मेडिकल एजूकेशन जम्मू के एसोसिएटेड अस्पतालों के डीन और जीएमसी के स्थायी प्रिंसिपल की तलाश शुरू हुई। इसमें इस्टेब्लिशमेंट एवं सिलेक्शन कमेटी ने एसोसिएटेड अस्पतालों के कुछ वरिष्ठ डाक्टरों के नामों पर मंथन किया, लेकिन आज तक किसी स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं की जा सकी है। डा. सिंह के बाद ईएनटी विशेषज्ञ डा. अनीस चौधरी जुलाई 2012 से अप्रैल 2013 तक, डा. शशि गुप्ता मई 2013 से अप्रैल 2014 तक, डा. घनश्याम देव गुप्ता अप्रैल 2014 से दिसंबर 2015, डा. जाहिद गिलानी दिसंबर 2015 से मार्च 2017 और मौजूदा डा. सुनंदा रैना मार्च 2017 से इंचार्ज प्रिंसिपल का कार्यभार देख रही हैं। मार्च में डा. जाहिद गिलानी को अचानक हटाकर डा. सुनंदा रैना को इंचार्ज प्रिंसिपल बनाया गया। उल्लेखनीय है कि जीएमसी श्रीनगर में केबिनेट की मुहर लगने के बाद स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति की गई है।
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