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मालवाहक वाहनों ने किया संपर्क सड़कों का कबाड़ा

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कठुआ। राज्य के वैकल्पिक प्रवेश द्वार नगरी में संपर्क सड़कों का कबाड़ा हो रहा है। सबसे ज्यादा मुश्किल नगरी तहसील के लिए बन गई है। कुछ वर्ष पूर्व ही कई सड़कों का निर्माण किया गया था। ब्लैक टॉपिंग कर लोगों को सड़क की सुविधा मिली थी, लेकिन टोल प्लाजा बनने के बाद बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई जो सड़कों का कबाड़ा कर रहे हैं।
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सड़कों को हाईवे की तर्ज इस्तेमाल तो किया गया, लेकिन अपग्रेड करने की योजना अधर में लटक गई। इसके चलते कई संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील होते गए, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है। दरअसल, राज्य के प्रवेश लखनपुर का ट्रैफिक लोड घटाने के लिए नगरी में टोल प्लाजा का निर्माण किया गया था। सरकार ने नगरी टोल प्लाजा निर्माण के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग का 40 फीसदी ट्रैफिक डायवर्ट करने की योजना बनाई, लेकिन सड़कों को अपग्रेड नहीं किया गया। पिछले नौ वर्ष से नगरी टोल प्लाजा मार्ग से बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही हो रही है। इसमें ज्यादातर लोड सैदपुर मार्ग पर है। सड़कों का निर्माण संपर्क मार्ग की तर्ज पर स्थानीय छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए किया गया था, ऐसे में बड़े वाहनों के अत्यधिक लोड ने साल-दर-साल सड़कों का कबाड़ा कर दिया। वर्तमान में नगरी कस्बे के संपर्क मार्ग बेहद जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में बड़े वाहन तो दूर छोटे वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। नगरी कसबे से लेकर वुजू पुल पार कर और माता बाला सुंदरी मार्ग की हालत खस्ता है। माता बाला सुंदरी मार्ग के दोहरीकरण का काम चल रहा है, लेकिन काम की रफ्तार और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के कारण स्थित में कोई बड़ा अंतर नहीं आया है। इन मार्गों पर कई बार हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। स्थानीय लोगों की माने तो संपर्क मार्ग की हालत किसी नाले से कम नहीं है। उन्होंने संपर्क स्थिति सुधारे जाने की मांग की है।
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