कठुआ। इसे विडंबना कहें या फिर सरकार की अनदेखी कि जहां एक ओर बसोहली में सरकार ने हाल ही एक करोड़ रुपये सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए निर्धारित कर दिया, वहीं कठुआ में पिछले 13 साल से सरकार द्वारा मंजूर किया गया सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट फाइलों में ही अटका हुआ है। ऐसा तब है जब कठुआ नगर परिषद की हद से ही रोजाना लगभग आठ से दस टन कचरा आसपास के नालों और रावी दरिया में खुले में गिराया जाता है। पिछले दस साल में करीब 3 लाख टन कचरा नदी-नालों में डालकर उन्हें प्रदूषित किया गया और यह क्रम आज भी जारी है, लेकिन सरकार कठुआ शहर में मंजूर होने के बाद भी सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट को क्रियान्वित नहीं कर रही है। स्वाभाविक है कि जब तक कचरे से निपटने का प्रबंध नहीं होगा, तब तक सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को अमल में लाना और जमीनी हकीकत बना पाना भी संभव नहीं है।
वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने यूआईडीएसएसएमटी स्कीम के तहत कठुआ के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मंजूर किया था। इसके लिए बाकायदा लगभग डेढ़ करोड़ की भारी भरकम राशि भी मंजूर की गई, लेकिन भूमि की निशानदेही आज तक संभव नहीं हो पाई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन द्वारा चिह्नित कुछ जगहों को उच्च अधिकारियों ने केंद्र के मानदंडों के अनुरूप न पाकर पहले ही रिजेक्ट कर दिया था। शहर से रोजाना निकलने वाला कचरा लगभग आठ से दस टन है। मासिक स्तर पर यह 250 टन के लगभग रहता है। साल भर में कठुआ शहर लगभग तीन लाख टन कचरा उगल रहा है। हैरानी की बात है कि यदि परियोजना को एक दशक पूर्व भी अमल में लाया गया होता तो प्रदूषण की वजह बने लगभग तीन लाख टन कचरे का निपटारा किया जा सकता था।
नाले हो रहे ब्लाक, सड़कों की हो रही दुर्दशा
वर्तमान में 17 वार्ड नगर परिषद कठुआ के अधीन हैं, जिसमें शहर की लगभग डेढ़ लाख आबादी रहती है। कायदे से नगर परिषद स्वच्छता शुल्क तो उन इलाकों से ले लेती है जहां तक नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की पहुंच है, लेकिन आज भी नए विकसित हो रहे वार्डों में साफ-सफाई और कचरा उठाने का कोई प्रबंध नहीं है। नतीजतन खुले में ही कचरा फेंका जाता है, जिससे नालियां जाम हो जाती हैं। गंदा पानी सड़क पर बहता है और लाखों करोड़ रुपये खर्च कर तैयार की गई सड़कें कुछ ही समय में अपना अस्तित्व खो देती हैं।
देनदारी के बोझ तले दबी नगर परिषद को हो सकती थी मोटी कमाई
यदि बसोहली में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के अनुसार कठुआ की परियोजना को भी उसी समय अमल में ला दिया गया होता तो बिजली विभाग की एक करोड़ से अधिक देनदारी का बोझ नगर परिषद को न झेलना पड़ता। यहां तक कि नगर परिषद के कर्मचारियों के लिए अक्सर आने वाले वेतन जारी करने की दिक्कत भी न होती। बसोहली की मंजूर हुई परियोजना के हवाले से बात करें तो नगर परिषद को पिछले दस सालों में करोड़ों की कमाई भी हो सकती थी, लेकिन परियोजना पर गंभीरता न दिखाए जाने से ऐसा संभव ही नहीं हो पाया।
सरकार की तरफ से मंजूरी का है इंतजार
सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भागथली में पचास कनाल भूमि हाल ही में चिह्नित की गई है। दिल्ली से आई एक टीम ने लगभग दो महीने पहले इस परियोजना के लिए सर्वे भी किया है। फिलहाल सरकार की ओर से मंजूरी का इंतजार है।
-संजीव गंडोत्रा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, कठुआ