खौड़ उपजिले की पंचायत सेड के गांव चमारकी के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलीठ फील्ड फायरिंग रेंज स्थल पर जाकर प्रशासन तथा राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते नारेबाजी की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर इसे शुरू किया गया तो बड़े पैमाने पर इसका विरोध किया जाएगा। प्रदर्शन में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ऐसा सुनने में आ रहा है कि सेना कलीठ फील्ड फायरिंग रेंज को 10 जनवरी को शुरू करेगी। अगर यह सही है तो इसका बड़े पैमाने पर विरोध किया जाएगा। इस मामले में अगर अखनूर व छंब के विधायक भी सेना का साथ दे रहे हैं तो वे यहां की अवाम के हक में अच्छा नहीं कर रहे हैं। प्रदर्शकारियों ने दोनों विधायकों के खिलाफ भी नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 1992-93 में इस रेंज पर फायरिंग होती थी। वर्ष 2014 में इसे सरकार ने बंद करा दिया। इन 22 सा मे हमें जितने कष्ट तथा जख्म सहे हैं उन्हें हम कभी भूल नहीं पाएंगे। इसलिए इस रेंज को हम किसी भी कीमत पर शुरू नहीं होने देंगे। क्योंकि इसकी वजह से हमारे गांव के कई लोगों की जान चली गई है, और कई लोग दिव्यांग हो चुके हैं। प्रदर्शन में कलीठ, सेड, कन्डेलयाल के ग्रामीण भी शामिल रहे।
जिंदगी में छा गया अंधेरा
फायरिंग रेंज स्थल पर मौजूद गांव चमारकी निवासी यशपाल शर्मा पुत्र बद्रीनाथ ने बताया कि वर्ष 1993-94 में इस रेंज की वजह से मेरी जिंदगी में अंधेरा छा गया। यशपाल ने बताया कि कक्षा छह में पढ़ता था, गांव चमारकी के नजदीक फायरिंग रेंज से आया एक गोला फटा, जिसके जहरीले धुएं से उसकी आंखें चली गईं। इस गम में माता पिता की समय से पहले मौत हो गई, लेकिन किसी ने भी मेरी आज तक सुध नहीं ली है ।
गोला गिरने से हुई पति की मौत
एक विधवा ने बताया कि पति की मौत भी इस फायरिंग रेंज की वजह से हुई है। वह स्कूटर पर इस नजदीक की सड़क पर जा रहे थे कि गोला सड़क पर आ गिरा, जिसकी चपेट में वह आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। और मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं मैं बेहद मुश्किल में उनका पालन पोषण कर रही हूं।
एसडीएम को दिया पत्र
फायरिंग रेंज बंद रखने की मांग पर गांव कला के ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय खौड़ पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की और गांव कला के ग्रामीणों ने एसडीएम खौड़ देवेंद्र पाल भगत को पत्र दिया कि इस फायरिंग रेंज को फिर से शुरू नहीं किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि अगर फायरिंग रेंज को फिर से शुरू किया गया तो हम लोग अपने माल मवेशियों सहित डीसी जम्मू के कार्यालय की तरफ कूच कर देंगे। गांव चमारकी के ग्रामीणो ने एसडीएम से कहा कि हमें किसी भी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं चाहिए।