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गोलाबारी के कारण शादी के लिए नहीं मिलते रिश्ते

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पुंछ। जिले में भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग से आगे बसे गांव नूरकोट, नक्कर कोट के ग्रामीणों मोहम्मद बशीर, मोहम्मद अयूब, हसन दीन आदि का कहना है कि उनके इलाकों में अक्सर पाक गोलाबारी करती है। लोगों का कहना है कि हमारे बाप दादा इसी क्षेत्र में बसते थे। हमने भी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली हर जंग में अपनी सेना का साथ दिया और सेना भी हमेशा हमारा साथ देती है। हमें अपना सच्चा साथी और देश का पहरेदार बता कर सम्मान देती है। लेकिन काफी समय से पाकिस्तानी सेना द्वारा नियंत्रण रेखा पर आए दिन की जाने वाली भारी गोलाबारी के चलते जहां हम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है, वहीं हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी हमारे बच्चों की शादियों के लिए रिश्ते न मिलना है। इससे आज हमारे गंाव में कई नौजवान युवक-युवतियों की शादी नहीं हो पा रही है।
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लोगों का कहना है कि अब हम लोग जहां भी रिश्ता मांगने के लिए जाते हैं, आगे वाले कहते हैं नहीं हमें आपके यहां शादी नहीं करना है। आपके गांव में अक्सर गोलाबारी होती रहती है। वहां पर जान का खतरा रहता है। अगर हम अपने बेटे या बेटी की शादी आपके गांव में करेंगे तो उनके बच्चों का क्या भविष्य होगा। आपके वहां तो न स्कूल ही खुलते हैं और न ही बच्चे खुले में अपनी मर्जी से खेल सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से उनके गांवों में बाहर से कोई बारात नहीं गई है। हां एक दो खुशनसीब युवक हैं, जिनको गांव में ही बसने वाले चाचा ताऊ की बेटियों के साथ रिश्ते मिल गए और उनकी शादी हो गई है। बाकी युवाओं की शादियों पर नियंत्रण रेखा पर चल रहे हालात ने पहरा बिठा दिया है।
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