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एनजीटी के फैसले पर सरकार को आड़े हाथों लिया

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हीरानगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा जम्मू कश्मीर स्थित बाबा अमरनाथ गुफा में भक्तों के जयकारों पर दिए गए फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद जमीनी स्तर पर पहुंचना शुरू हो गया है। हालांकि, एनजीटी ने अपने फैसले में बहुत से संशोधन कर स्थिति को नियंत्रण करने के प्रयास किए हैं, लेकिन लोग इस फैसले को पूरी तरह से खारिज करने की मांग कर रहे हैं।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय टगोत्रा ने कहा कि एनजीटी इमोशनल ब्लैकमेल कर देश के लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने का प्रयास न करे। लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएं तो शांति बनी रहेगी अन्यथा कभी भी इन फैसलों को आम लोग चुनौती दे सकते हैं। अफसोस की बात है कि फैसले में जो संशोधन किए भी गए हैं वे भी लोगों के रोष के बाद किए गए हैं। राज्य की वर्तामान सरकार की तरफ से सही राय दी गई होती तो इस तरह का फैसला करने में एनजीटी कई बार सोचता।
समाज सेवक राकेश कुमार केशी ने कहा कि राज्य सरकार में भाजपा होने के बावजूद भी हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ होना केवल राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कभी भी मुमकिन नहीं हो सकता कि एनजीटी सरकार से बिना सलाह किए इतना बड़ा फैसला कर सके। इस फैसले के पीछे कहीं न कहीं कश्मीरी हुकूमत एक बार फिर से हावी होती दिख रही है जिसे आम लोग तो समझ रहे हैं, लेकिन भाजपा नहीं।
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कांग्रेसी के रोमी शर्मा ने कहा कि एनजीटी का फैसला हिंदुओं की आस्था के खिलाफ है। इस फैसले को जल्द वापस लिया जाना चाहिए। राज्य की वर्तमान सरकार इस मामले में पूरी तरह से संलिप्त है।
समाज सेवक चौधरी दलबीर सिंह ने कहा कि जब से लोगों ने भाजपा को अपना प्रतिनिधित्व दिया है तब से ही हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सत्ता प्राप्त होने के बाद यह पार्टी पूरी तरह से कश्मीरी हुक्मरान के आगे घुटने टेक चुकी है। माता वैष्णो देवी में यात्रियों की संख्या तय करने का मसला हो या फिर हेलीकाप्टर के किराए में बढ़ोतरी का मसला हो भाजपा पूरी तरह से मौन रही है। लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए एनजीटी को यह फैसला वापस लेना चाहिए। कूटा निवासी अमन शर्मा ने कहा कि एनजीटी का फैसला भले ही पर्यावरण की आड़ में लिया गया हो लेकिन इसमें राज्य सरकार की मिलीभगत को अनदेखा नही किया जा सकता।
नेकां नेता एवं पूर्व सरपंच प्रेम रतन ने कहा कि राज्य में अगर गैर भाजपा सरकार होती और इस तरह का फैसला आता तो सियासी लाभ के लिए पूरी भाजपा सड़कों पर उतर आई होती, लेकिन अब जब अपने ही शासन में हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है तो यह पार्टी सत्ता का सुख को तरजीह दे रही है।
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