रामगढ़ ।
सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीण पाकिस्तान की गोलाबारी से काफी परेशान हैं। ऐसे में उन्हें अक्सर पलायन करना पड़ता है। हालांकि वे सुरक्षा के लिए पक्के बंकर की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पाक की गोलाबारी से हर बार रामगढ़ क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक सीमावर्ती ग्रामीणों को पलायन करना पड़ता है । वर्ष 2002 और फिर वर्ष 2014, 16 व, 17 में भी पाकिस्तान की अकारण गोलाबारी ने सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने आज तक उनकी सुरक्षा के लिए बंकर नहीं बनाए। ऐसे में जब गोलाबारी शुरू होती है तो उन्हें कोई सहारा नहीं मिलता, जिसके कारण दर्जनों लोग जान गवां चुके हैं। पाकिस्तान की गोलाबारी से लोगों की सांसें अटकी ही रहती हैं और किसान भी अपनी फसलों को पानी लगाते समय डरते रहते हैं कि पाक का कोई भरोसा नहीं कब गोलाबारी शुरू कर दे।
क्या कहते हैं सीमावर्ती किसान
सीमावर्ती रामगढ़ क्षेत्र के गांव अबताल, नगाए दग छनी, जेराए और नंदपुर के किसानों का कहना है कि तारबंदी के दायरे में आने वाली जमीन का अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीण रोशन चौधरी ने कहा कि तारबंदी के आगे की जमीन पर किसान खेती करने से घबराते हैं क्योंकि एक तो पाक का कोई भरोसा नहीं तो दूसरी ओर जंगली जानवर उनकी फसल बर्बाद कर देते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की हालत और भी खराब हो गई है। किसान चौधरी भगवान सिंह ने कहा कि इस समय खेतीबाड़ी को खत्म करने की प्रथा चल रही है, जो आने वाले समय में घातक साबित होगी। किसी अन्य वर्ग का कोई नुकसान हो जाए तो उसे पूरा मुआवजा दिया जाता है, परंतु किसानों की पूरी फसल तबाह हो जाए तो भी कोई भी सुनवाई नहीं होती है। चौधरी नरसी, बाबू राम, रोशन चौधरी, रमेश सिंह, भगवान शर्मा, सुभाष चंद्र, देवेंद्र कुमार ने कहा कि 18 साल से वह परेशानी का सामना कर रहे हैं। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के सांबा जिला के रामगढ़ सेक्टर के ग्रामीण दशकों से असुविधाएं झेलने को मजबूर हैं। कभी पाक फायरिंग तो कभी खेतीबाड़ी बंद होने का दर्द आज भी सीमांत ग्रामीणों के चेहरों पर साफ देखने को मिलता है। सरकार ने वादे किए लेकिन इन्हें पूरा नहीं किया जिस कारण ग्रामीणों का दर्द आज भी कम नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किसानों ने कहा कि अरसे से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने वाले ग्रामीणों को अगर आज तक कुछ मिला है तो वो है सिर्फ आश्वासन, और जन प्रतिनिधियों द्वारा दिखाए गए सपने। किसानों ने कहा कि अगर उन्हें जमीन का जल्द मुआवजा नहीं दिया गया तो सीमावर्ती गांव के किसान सड़कों पर उतर आएंगे।