प्रवेश कुमारी
जम्मू। सरकारी वादों की किताब से आदर्श केसर गांव जमीन पर नहीं उतर पा रहा। पीडीपी-भाजपा के मिले-जुले घोषणा-पत्र में दर्ज अखरोट/बादाम के कथित मॉडल गांव भी फाइलों में दम तोड़ने की कगार पर है। इन लोकलुभावन वादों को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सेब पर सरकार ने थोड़ी रहम दिली जिरूर दखाई है। तीन साल के इंतजार के बाद सरकार ने पांच करोड़ की लागत से दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में खिराम-सिरहामा की 80 कनाल जमीन पर मॉडल सेब गांव बसाने की तरफ कदम बढ़ाया, लेकिन पायलट बेसिस पर। रियासत के दूसरे जिलों में इसे तभी शुरू किया जाएगा, जब अनंतनाग कोशिश कामयाब रहे। फिलहाल यह दूर की कौड़ी है।
जिस वक्त तीन साल पहले पीडीपी चुनावी मैदान में उतरी थी, उसने स्व सतत विकास और रोजगार को बढ़ावा देने नाम पर माडल बिजनेस गांव स्थापित किए जाने का रियाया से वादा किया था। इसके तहत माडल सेब गांव, माडल केसर गांव, माडल अखरोट/बादाम गांव और माडल शिल्प गांव की स्थापना शामिल थी। बाद में पीडीपी ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई, जिसके बाद घोषणा-पत्र के वादे गठबंधन एजेंडा में शामिल हो गए। लेकिन माडल गांव बनाने का वादा दोनों ही पार्टियों की प्राथमिकता से दूर रहा।
सरकार के तीन साल पूरे होते-होते सेब गांव के सेट अप की तरफ जरूर कदम बढ़ाया गया, लेकिन यह कितना कारगर होगा, यह भविष्य केगर्भ में है। दावा किया जा रहा है कि परंपरागत तरीकेसे हटकर हाई डेंसिटी पौध रोपण, नलकूल खोदी जाएंगी, पुराने बागों का नई वैरायटी से पुनर्जीवन किया जाएगा, ट्रैक्टर जैसी फार्म मश्ीानें दी जाएंगी, जूस प्रीजरवेशन प्लांट लगाया जाएगा, किसानों को ग्रेडिंग, पैकिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। कुल मिलाकर इस अकेले गांव से रियासत की अर्थव्यवस्था को बदले जाने का दावा किया जा रहा है।
दो-तीन माह में सेट अप होगा अखरोट/बादाम गांव
माडल सेब गांव से पहल हो गई है। पायलट आधार पर स्थापित किया गया है। अब अखरोट/बादाम माडल गांव स्थापित किया जाएगा। इसमें दो-तीन माह लगेंगे।
-गुलाम नबी लोन हंजूरा, कृषि मंत्री