राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा विभाग में स्वीकृत पदों पर कार्य कर रहे हेल्परों को नियमित भर्ती नहीं किए जाने के मामले में राज्य के प्रमुख चिकित्सा सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश राजेश सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 16 सितंबर 2013 को दस हजार से अधिक पद स्वीकृत किए थे, लेकिन इन पदों पर नियमित भर्ती नहीं की जा रही। याचिकाकर्ता वर्ष 2011 से निशुल्क दवा योजना में हेल्पर के रूप में संविदा पर काम कर रहा है।
याचिका में हेल्पर के पदों पर नियमित नियुक्ति देने और समान कार्य के आधार पर समान वेतन दिलाए जाने की गुहार की गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।