राजस्थान हाईकोर्ट ने आरसीए के सचिव पद से निलंबित किए गए आरएस नांदू से 29 अगस्त तक बताने को कहा है कि उन्होंने किस अधिकार से आरसीए के नाम से याचिका दायर की है।
अदालत ने कहा कि आरसीए कार्यकारिणी की ओर से उन्हें इस संबंध में अधिकृत करने के प्रस्ताव अदालत में पेश किए जाएं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश आरसीए जरिए सचिव आरएस नांदू की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया। प्रार्थना पत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि बीसीसीआई की ओर से आरसीए पर किए गए निलंबन को हटाने के लिए वार्ता चल रही है। जिसके तहत ललित मोदी को हटाने के साथ-साथ अदालतों में चल रहे मुकदमों को भी वापस लेने की कार्यवाही चल रही है।
आरसीए ने आरएस नांदू को सचिव पद से निलंबित कर संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर को कार्यवाहक सचिव बनाया है। ऐसे में नांदू को आरसीए के नाम से याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में अनाधिकृत व्यक्ति की ओर से याचिका दायर करने के आधार पर इसे खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नांदू को इस संबंध में अधिकृत करने का प्रस्ताव पेश करने को कहा है। नांदू की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि बीसीसीआई ने तीन साल से आरसीए पर प्रतिबंध लगा रखा है। ललित मोदी के आरसीए कार्यकारिणी में नहीं रहने के कारण अब आरसीए से निलंबन हटाया जाए।