राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रमुख शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक सहित अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि दिव्यांग प्रबोधकों का स्थानान्तरण करने के संबंध में राज्य सरकार की क्या नीति है? इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए पांच मार्च का समय दिया है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश विद्यासागर शर्मा की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2002 में सवाईमाधोपुर के लाखनपुर में प्रबोधक लगा था। वहीं वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने प्रबोधकों को तृतीय श्रेणी शिक्षकों के समान वेतन परिलाभ दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में समानीकरण के तहत दिव्यांग शिक्षकों को गृह जिले या इच्छित स्थान पर स्थानान्तरित करने का निर्णय लिया।
याचिका में कहा गया कि इसके विपरीत याचिकाकर्ता का घर से सौ किलोमीटर दूर दुर्गम स्थान पर ट्रांसफर किया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि गत 22 दिसंबर को प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने कुछ तृतीय श्रेणी अध्यापकों का गृह जिले में ट्रांसफर किया, जिसका आधार शिक्षक या उसके परिजनों की गंभीर बीमारी रखी गई। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार दिव्यांग तृतीय श्रेणी शिक्षकों को इच्छित स्थान पर ट्रांसफर कर रही है, लेकिन प्रबोधकों को इससे दूर रखा जा रहा है।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।