भारत सरकार की कंपनी यूरेनियम कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया इन दिनों राजस्थान के उयपुरवाटी के गांव जहाज में यूरेनियम निकाल रही है। यूरेनियम के बाद अब जहाज गांव इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि यहां ड्रिलिंग के चलते भू—जल प्रदूषित हो रहा है। इसी के सबंध में सोमवार को प्रदेश के भूजल मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने विधानसभा में जानकारी दी है कि पेयजल की जांच के लिए भूजल विभाग की टीम भेजी जाएगी। गोयल ने कहा कि यदि पानी दूषित पाया गया तो विभाग द्वारा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
यह है मामला
उदयपुरवाटी से विधायक शुभकरण चौधरी की ओर से क्षेत्र में प्रदूषित पानी के सबंध शिकायत की गई थी। इसके बाद जहाज गांव के 12 जल स्त्रोतों व मावता के तीन जल स्त्रोतों से पानी के सैम्पल लिए गए थे। जिसमें पाया गया था कि जहाज गांव के पांच नलकूपों से आ रहा पानी दुर्गंध युक्त है। हालांकि इनका उपयोग कृषि कार्यों के लिए हो रहा है। जबकि इन नलकूपों के पानी में अन्य रसायनों की स्थिति सामान्य है।
इसलिए प्रदूषित हो रहा है
यूरेनियम कॉर्पोरेशन आॅफ इण्डिया की ओर से क्षेत्र में यूरेनियम की जांच के लिए होरिजेन्टल कोर ड्रिलिंग कार्य किया जा रहा है। ड्रिलिंग के लिए कटिंग आॅयल फोम का उपयोग किया जा रहा है। ड्रिलिंग के दौरान रॉड कुछ निजी बोरवैल के समीप से गुजरने से इन बोरवैल के पानी में कटिंग आॅयल की दुर्गंध हो गई है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दुर्गंध अस्थायी है जिसे नलकूपों को निरंतर चलाकर दूर किया जा सकता है।
मंत्री ने माना नहीं लेते अनुमति
इस विषय पर वन व पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह का कहना है कि यूरेनियम की खोज के लिए केन्द्र सरकार को पर्यावरण व प्रदूषण विभाग से किसी भी तरह की अनुमति की जरुरत नहीं होती। मंत्री ने दावा किया कि यूरेनियम सुरक्षित तरीके से निकाला जा रहा है।