बाड़मेर जिले में स्थित मुनाबाव कस्बे में यूएसए आजकल खासी दिलचस्पी दिखा रहा है। पिछले सप्ताह यहां स्थित रेलवे स्टेशन पर अमेरिकी दूतावास से आर्थिक मामलों के प्रमुख डगलस फाउलर पहुंचे थे। उनका यहां आने का सही उद्देश्य तो किसी को नहीं पता। लेकिन उनके साथ आए एक कस्टम अधिकारी के अनुसार फाउलर ने यहां भारत—पाक के बीच होने वाले व्यापार में दिलचस्पी दिखाई है। वे इससे पूर्व अटारी स्टेशन भी जा चुके हैं।
आधिकारिक रूप से नहीं होता है व्यापार
दरसल मुनाबाव भारत—पाक बॉर्डर पर स्थित आखिरी भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन है। जहां से पाकिस्तान के खोखरापार के लिए यात्री ट्रेन का संचालन होता है। खोखरापार पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है। यहां चलने वाली थार एक्सप्रेस के माध्यम से दोनों मुल्कों के यात्री बहुत कम स्तर पर कुछ सामान इधर से उधर ले जाते है। इस रूट पर दोनों देशों के मध्य आधिकारिक रूप से कोई व्यापार नहीं होता है।
क्यों एकत्रित की जा रही है जानकारी
उनके साथ एक सीनियर अधिकारी के अनुसार अमेरिका मुनाबाव और अटारी स्टेशन से किस प्रकार पाकिस्तान के साथ व्यापार होता है, इसकी जानकारी एकत्रित कर रहा है। हालांकि इसका कारण स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस प्रकार की जानकारी क्यों जुटा रहा है?
फाउलर ने जाना
डगलस फाउलर ने थार एक्सप्रेस से आने वाले यात्रियों के माध्यम से जानकारी ली कि वह किस प्रकार का सामान ले जाते हैं और लाते हैं। साथ ही इस स्टेशन पर कस्टम विभाग की गतिविधियां क्या होती है? जानकारी के अनुसार अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने बहुत ही बारीकी से देखा कि यहां किस प्रकार काम होता है?
वर्ष 1965 से बंद है ट्रेड रूट
दरसल वर्ष 1965 तक भारत—पाक के बीच इस ट्रेन रूट से व्यापार होता हैं। लेकिन लड़ाई के बाद से इस ट्रेड रूट को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। उसके बाद वर्ष 2006 से इस रुट पर एक यात्री गाड़ी थार एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा हैं, जो सप्ताह में एक बार चलती है।