उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र में संसदीय संप्रभुता व स्वायत्तता सर्वोपरि है। न्यायपालिका या कार्यपालिका संसद में कानून बनाने या संविधान में संशोधन करने की शक्ति को अमान्य नहीं कर सकती। न्यायिक नियुक्तियों पर केंद्र सरकार व कॉलेजियम में टकराव के बीच उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून को सुप्रीम कोर्ट से रद्द किए जाने पर फिर नाखुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि दुनिया के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा कहीं नहीं हुआ है।
न्यायपालिका मर्यादा का पालन करे : बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, विधायिका ने हमेशा न्यायपालिका की शक्तियों व अधिकारों का सम्मान किया है। न्यायपालिका भी मर्यादा का पालन करे। उम्मीद की जाती है कि उसे जो सांविधानिक अधिकार हैंै, उनका उपयोग करे, लेकिन अपनी शक्तियों का संतुलन भी बनाए रखे। लोकतंत्र के तीनों अंग कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के अपने अधिकार हैं। सभी को एक-दूसरे का ख्याल रखते हुए विश्वास व संतुलन से काम करना चाहिए।
कई बार लगा अदालतें हस्तक्षेप कर रही हैं : गहलोत
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि आज सोशल मीडिया का जमाना हैं। कार्यपालिका व विधायिका को कई बार लगता है, न्यायपालिका हस्तक्षेप करती हैं, इसके बावजूद 75 साल बाद भी तीनों अंग काम कर पा रहे हैं, ये हमारी पहचान है।