कहा जाता है कि किसी को भीख देने से अच्छा है उसे आत्मनिर्भर बनाया जाए, इसी सोच के साथ शहर में कई संगठन इसी दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक संगठन है सुजस सांस्कृतिक सेवा संस्थान, जो समाजसेवियों के सहयोग से ऐसी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है जो आर्थिक रूप से कमजोर है लेकिन जीवन में कुछ करने की ललक और दृढ़ इच्छा शक्ति पूरी है।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के अनुसार जब वे इस तरह के शिविर में आई थीं तब उन्हें यह लगता था कि जीवन में कभी वो खुद का काम नहीं कर सकतीं थीं लेकिन अब वे सिलाई बुनाई सीखकर घर का कामकाज करने के साथ ही महिलाओं के परिधान सिलकर पैसा भी कमा रहीं हैं।
स्वयं सहायता समूह को चलाने वाली अंजु जांगिड़ ने बताया कि पिछले तीन सालों से वे इस तरह के शिविरों का संचालन जयपुर के वार्ड नम्बर 1 से 14 तक अलग—अलग क्षेत्रों में कर रही हैं।
शिविर कहीं दो महीने और कहीं तीन महीने के लिए लगाए जाते हैं जो किसी भी विद्यालय या किसी भवन में लगाए जा सकते हैं जहां पर महिलाएं खुद इसके लिए इच्छुक हों। वर्तमान में यह शिविर वार्ड नम्बर 10 स्थित खेड़ा में समाजसेवी पवन गोयल के सहयोग से निरन्तर जारी हैं।
मुरलीपुरा—दादी का फाटक निवासी राजबाला जांगिड़ ने बताया कि उन्होंने करीब तीन महीने पहले इस शिविर में प्रशिक्षण लिया था। यहां से सिलाई—बुनाई सीखने के बाद अब हर महीने वे चार—पांच हजार रूपए कमा लेती हैं जिससे परिवार में सहारा लगता है। ऐसी ही एक अन्य महिला दधिची नगर निवासी गुलाब सैनी ने बताया कि उन्होंने पिछले साल जुलाई में निवारू रोड पर लगे शिविर में प्रशिक्षण लेकर अपना सिलाई का काम शुरू किया। इसके बाद वे धीरे—धीरे हर महीने दो—तीन हजार तक कमाने लगी है।