बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि ऊंट तस्करी में उत्तर प्रदेश के बागपत का एक संगठित माफिया सक्रिय है। ये तस्कर ऊंट को यहां से असम, पश्चिम बंगाल और बंग्लादेश के बॉर्डर पार, बिहार, तेलांगाना और कर्नाटक कटनी के लिए ले जाते हैं।
उन्होंने दावा किया है कि यहां से 10 से 15 हजार में ऊंट खरीदने के बाद उसे आगे एक लाख तक बेचा जा रहा है। यहीं नही इस अवैध कारोबार से काला धन पैदा करने वाला संगठित माफिया भी जुड़ा है, जो इसका पैसा आतंकवाद की फंडिंग में इस्तेमाल होता है। इसके जरिए नकली नोट भी देश में दाखिल करवाए जा रहा है। आईयूसीएन ऊंटो को विलुप्तप्राय जानवर मान चुकी है।
साथ ही, उन्होंने ऊंट और मवेशियों की तस्करी के लिए बने कानून की पालना नहीं करने का भी आरोप लगाया है। बोर्ड अधिकारियों ने लालच और लापरवाह अधिकारियों के कारण प्रदेश की संस्कृति का मजाक बनाने का भी सरकार पर आरोप लगाया है।