राजस्थान हाईकोर्ट ने बीसीसीआई-आरसीए विवाद से जुडे मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि पूर्व में निखिल डोरू के मामले में दिए आदेश की पालना में गठित कमेटियां ही सत्र 2017-18 के लिए प्रदेश के खिलाडियों का चयन करे।
अदालत ने पूर्व में गठित पांच सदस्यीय कमेटी में से विवेकभानसिंह और भारत भूषण को कमेटी से हटा दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर को तय की है। अदालत ने एक बार फिर दोहराया है कि आपसी विवादों से खेल-खिलाडिय़ों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जयपुर जिला क्रिकेट संघ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में निखिल डोरू के मामले में सुनवाई करते हुए 11 अक्टूबर 2014 को सीनियर वर्ग, जूनियर वर्ग और महिला वर्ग के खिलाडियों के लिए चयन कमेटी गठित की थी। सीनियर वर्ग के लिए अदालत ने संजय व्यास, विनोद माथुर, नजमूल हुसैन, विवेक भानसिंह भारत भूषण और समन्वयक के तौर पर रोजर बिन्नी को लगाया था। वहीं जूनियर वर्ग के लिए कुलदीप माथुर, प्रमोद यादव और सुखविन्दरसिंह की कमेटी बनाते हुए कॉनर विलियम्स को समन्वयक नियुक्त किया था। जबकि महिला वर्ग की खिलाडियों के चयन के लिए मेघा गौड, शबाना खान और प्रतिमा भारती की कमेटी बनाते हुए रीटा डे को समन्वयक नियुक्त किया था।
अदालत ने तापोष चटर्जी को मामले में समन्वयक नियुक्त किया था। वहीं 11 सितंबर 2015 को अदालत ने रोजर बिन्नी के स्थान पर राजेन्द्रकुमार हंस, कॉनर विलियम्स की जगह प्रीतम गांधेय और रीटा डे के स्थान पर हेमतला काला को नियुक्त करते हुए अमृत माथुर को कमेटी में रखा था। अदालत ने गत वर्ष 29 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए राजेन्द्रकुमार हंस व प्रीतम गांधेय के स्थान पर गगन खोडा और ज्ञानेन्द्र पांडे को स्थान दिया था। अदालत ने आरसीए की प्रार्थना पर गैरी क्रस्टर्न, आईएन पंत और कैथरीन डेल्टन को कोच नियुक्त किया था।