राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि जनहित याचिका गरीब व दिव्यांग और अदालतों में नहीं पहुंचने वालों के लिए दायर की जाती है। इसके साथ ही अदालत ने हाईकोर्ट के लिए जमीन के संबंध में दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के लिए भूमि की आवश्यकता को प्रशासनिक स्तर पर देखा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग और न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश प्रहलाद शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट को 1954 में तीस बीघा भूमि आवंटित हुई थी।जबकि वर्तमान में यह बीस बीघा भूमि पर ही बना हुआ है। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट के पास स्थित वन भवन, कृषि भवन, कर भवन और इंदिरा गांधी नगर का कार्यालय हाईकोर्ट की भूमि पर बने हैं। ऐसे में इन भवनों को खाली करवाकर भूमि हाईकोर्ट के उपयोग के लिए ली जाए।