भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में नजारा अलग ही था। गांव के 10—12 लोग हाथ में अगरबत्ती और जोत लिए किसी की तलाश में इधर—उधर भटक रहे थे। इनके हाव—भाव देख मरीज और उनके परिजन सहमे हुए थे। सब चौंक गए जब पता चला कि गांववाले 35 साल पहले मरे दो जनों की आत्मा की तलाश कर रहे हैं।
रायला क्षेत्र के बड़ी कुंडिया गांव के एक परिवार की बहू की मौत इस सरकारी अस्पताल में 35 साल पहले प्रसव के दौरान हो गई थी। इस दौरान बच्चे की भी मौत हो गई थी। गांव वाले कहते है कि इस बहू—बच्चे की आत्मा यहां भटक रही है। जब तक इनकी मुक्ति नहीं होगी, वे उन्हें परेशान करती रहेगी। इस अंधविश्वास के चलते ये इन आत्माओं को तंत्रमंत्र से अपने साथ ले जाएंगे। इसी तरह यहां भीलवाड़ा शहर के बीलियां के लोग भी यहां आत्मा तलाश रहे थे।
गांव वाले अगरबत्ती हाथ में लेकर प्रसुताओं के वार्ड में भी घुस गए। उनका कहना था कि परिवार की महिला ने चार महीने पहले बच्चे को जन्म दिया था। वह पैदा होते ही मर गया था। अब उसकी आत्मा को यहां से नहीं ले जाएंगे तो हमें परेशान करेगा। कथित तौर पर वे आत्मा को अपने साथ लेकर भी गए।
स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों के अनुसार इस तरह के वाकये यहां काफी होते हैं। लोग कहते हैं कि इस अस्पताल में बीमारी या अन्य किसी अन्य वजह से मरने वालों की आत्मा यहीं भटकती रहती है। जब तक आत्मा की शांति नहीं होती वे उन्हें परेशान करती है।
ऐसे में कथित आत्माओं को यहां से तंत्र-मंत्र से ले जाने का अंधविश्वास है। खासकर नवरात्रों और कुछ खास दिनों में यहां इस तरह के तंत्र-मंत्र और टोने-टोटके खूब होते है। इस दौरान अस्पताल का माहौल कुछ अलग ही हो जाता है।
इस मामले अस्पताल के पीएमओ डॉ. के.सी. पंवार का कहते है कि अंधविश्वास के चलते कुछ परिजन इस तरह की तांत्रिक क्रियाएं करते है। अस्पताल परिसर में इन्हें करने की छूट नहीं है। ये लोग बाहर करते है। इस पर भी पाबन्दी लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भी अंधविश्वास का मामला सामने आया था। यहां आईसीयू के बाहर एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में फड़फड़ता मुर्गा लेकर एक युवक तांत्रिक का इंतजार करता रहा और प्रशासन ने मौन साध लिया था।
उसका कहना था कि अभी बाबा आएंगे और उनके परिचित को जिंदा कर देंगे। इसके बाद वह तांत्रिक शव के पास ही करीब चार घंटे तक टोने—टोटके करता रहा था।