राजस्थान हाईकोर्ट ने रींगस के पास मंदिर माफी की जमीन से जुड़े मामले में रेवन्यू बोर्ड के आदेश की क्रियान्विती पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने आदेश की कॉपी रेवन्यू बोर्ड के चेयरमैन को भेजते हुए कहा है कि प्रकरण को 34 साल बाद बोर्ड के समक्ष उठाया गया है, लेकिन बोर्ड ने प्रकरण की सुनवाई में देरी का उल्लेख तक नहीं किया।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अतिरिक्त राजकीय अधिवक्ता धमेन्द्र पारीक ने अदालत को बताया कि रींगस के पास स्थित करीब तीस बीघा भूमि को 21 दिसंबर 1981 को भूप्रबंध अधिकारी ने मंदिर माफी के नाम दर्ज की। वहीं गुलाब देवी व अन्य ने भू-राजस्व अधिनियम की धारा 9 के तहत सीधे रेवन्यू बोर्ड में प्रार्थना पत्र दायर कर भूमि को निजी खातेदारी में दर्ज करने की गुहार की। जिसे रेवन्यू बोर्ड के सदस्य ने जनवरी 2015 में स्वीकार करते हुए जिला प्रशासन को आदेश दिए कि वह भूमि को गुलाब देवी व उसके वारिसों के पक्ष में दर्ज करे। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।