फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Teachers Day: राजस्थान के शिक्षक ने 400 बच्चों को मानव तस्करी से करवाया मुक्त, अब राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

Mon, 05 Sep 2022 09:04 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

उदयपुर के सरकारी स्कूल में रहने वाले शिक्षक मानव तस्करों से भीड़ गए। एक रात तो 20-25 बदमाशों ने उन्हें जान से मारने के लिए घेर लिया लेकिन इस बहादुर शिक्षक ने बच्चों को मानव तस्करी से मुक्त करवाने की मुहिम को नहीं छोड़ा।
विज्ञापन
दुर्गाराम मुवाल - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिक्षक छात्र के जीवन में रौशनी भरने का काम करते हैं। यही वजह है कि 5 सितंबर को शिक्षक के सम्मान में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। इस बार राजस्थान के दो शिक्षक को राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू सम्मानित करेंगी। जिनमें एक नागौर के शिक्षक दुर्गाराम मुवाल भी हैं, जिन्होंने बच्चों के जीवन में शिक्षा का अलख तो जगाया ही, इसके साथ ही उन्होंने कई बच्चों को बालश्रम और मानव तस्करी जैसे दलदल से बाहर निकाला।

विज्ञापन

उदयपुर में आदिवासी बच्चों से करवाया जाता है बालश्रम 
राजस्थान का उदयपुर जिला अपनी खूबसूरती और पर्यटनस्थल के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है लेकिन इसकी खूबसूरती पर मानव तस्करी काला धब्बा है। उदयपुर से आदिवासी बच्चों को गुजरात ले जाकर मजदूरी करवाई जाती है। मानव तस्कर नन्हें-मुन्ने बच्चों को बालश्रम में धकेल कर उनकी जिंदगी से रंग छीन लेते हैं। ऐसे ही कई बच्चों को मानव तस्करी के दलदल से छुड़ाकर जिंदगी संवारने का बीड़ा उठाया नागौर के रहनेवाले शिक्षक दुर्गाराम ने। वे मूलतः नागौर के रहने वाले हैं और उदयपुर में फलासिया पंचायत समिति के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पारगियापाडा स्कूल में कार्यरत हैं।

घर-घर चलाया जागरुकता अभियान
दुर्गाराम ने उदयपुर के आदिवासी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि नियमित तौर पर आने वाले कुछ बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया। जब उन्होंने बच्चों के बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि बच्चों को गुजरात सीमा पर बालश्रम के लिए भेज दिया गया है, जहां बेहद कम पैसों पर बच्चों से 18-18 घंटे मजदूरी करवाया जाता है। दुर्गाराम बताते हैं कि कई बिचौलिए इस बाल तस्करी में लिप्त थे। वे बच्चों को बिचौलियों से बचाना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने अभिभावकों के बीच शिक्षा को लेकर जागरूकता अभियान की शुरुआत की। 2008 से निरंतर दुर्गाराम घर-घर जाकर शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा की।

बच्चों को शिक्षा से जोड़ा
वहीं वे मानव तस्करी के बारे में सूचनाएं भी जुटाने लगे। उसके बाद उन्होंने बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाना शुरू किया। तब से अब तक दुर्गाराम ने 400 बच्चों को नारकीय जीवन से मुक्त करवाया है। जिनमें 250 से अधिक लड़कियां हैं। ये सभी बच्चे गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और राजस्थान के विभिन्न जिलों से मुक्त करवाया। इस शिक्षक ने न सिर्फ बच्चों को मानव तस्करी से मुक्त करवाया बल्कि उन्हें शिक्षा से भी जोड़ा।


 
विज्ञापन

आधी रात को शिक्षक को तस्करों ने घेर लिया था
शिक्षक ने बताया कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग की अधिकांश घटनाएं रात में होती है। ज्यादातर घटनाओं को मैंने अकेले ही रोका है। कुछ में पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन का सहारा लिया। उन्होंने बताया कि एक बार 25-30 लोगों ने मुझे मारने के घेर लिया था, जिसके बाद मैंने डटकर उनका सामना किया। 

दुर्गाराम मुवाल को उनके इस कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेगीं। इसमें देशभर के अन्य शिक्षक भी रहेंगे। जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया। राजस्थान से दुर्गाराम के अलावा बीकानेर की एक महिला शिक्षक भी शामिल हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें