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44 जिंदगी लील चुका है स्वाइन फ्लू, अब तापमान गिरने से बढ़ रहा है 'डर'

Tue, 04 Jul 2017 01:58 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
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मानसून की बारिश ने इस बार स्वाइन फ्लू के डर को और बढ़ा दिया है। तपती गर्मी में चालीस डिग्री के तापमान पर ही 44 जानें लील चुके स्वाइन फ्लू का खतरा अभी टला नहीं है। बारिश शुरू होने के बाद कम होते तापमान पर स्वाइन फ्लू का वायरस और कहर ढहा सकता है।
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एक्सपर्ट्स के अनुसार स्वाइन फ्लू का वायरस कम होते तापमान पर ज्यादा असर डालता है। लेकिन इस साल बिल्कुल उलट स्थिति देखने को मिली थी। इस साल गर्मियां चरम पर होने के बावजूद भी स्वाइन फ्लू के वायरस ने कई लोगों की जान ली।

आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में करीब चार सौ लोग स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाए गए हैं। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ी हुई है कि बारिश के बार जैसे-जैसे तापमान में कमी होगी, तो  कहीं इस वायरस का प्रभाव बढ़ न जाए।
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बारिश का सीजन होता है एच1एन1 के लिए माकूल

फाइल फोटो।
स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार एच1एन1 वायरस के लिए बारिश के सीजन को सबसे माकूल माना जाता है। कहा जाता है कि इस सीजन में तापमान में कमी होने के चलते यह ज्यादा तेजी से फैलता है। पिछले दिनों स्वाइन फ्लू का असर राजधानी जयपुर में तो देखने को मिला ही, साथ ही कोटा, जोधपुर, अजमेर जैसे बड़े शहरों में भी कई लोग स्वाइन फ्लू के चलते मारे गए।

अस्पतालों में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पहले ही इंतजाम किए हुए हैं, लेकिन आशंका है कि अब एकाएक इसके मरीजों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इसी अाशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने कमर और भी कस ली है।

विभाग की ओर से टैमी फ्लू की उपलब्धता को लेकर निर्देश जारी किए जा चुके हैं। वहीं स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।
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