जैन मुनि तरुण सागर महाराज के कड़वे प्रवचनों के लिए एक अनोखा पांडाल तैयार किया जा रहा है। इस पांडाल तैयार करने के लिए जर्मन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ये पांडाल न जलेगा और न ही आंधी में उड़ेगा। इस पांडाल में खंभे भी नहीं होंगे। दावा किया जा रहा है कि यह अपनी तरह का कुछ अलग ही पांडाल होगा।
सीकर में 23 जुलाई से शुरू होने वाले चातुर्मास कार्यक्रम में जैन मुनि तरुण सागर महाराज के प्रवचन होंगे। उनके कड़वे प्रवचनों के लिए एक खास पांडाल का निर्माण किया जा रहा है। जर्मन हैंगर तकनीक की मदद से बनाए जाने वाले इस पांडाल में एक भी खंभा नहीं है।
दरअसल, क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनि तरुणसागर के चातुर्मास कालीन कार्यक्रमों के लिए विशेष रुप से पांडाल का निर्माण रामलीला मैदान पर किया जा रहा है। ब्रह्मचारी सतीश भैया ने बताया की 9 जुलाई को इसी पांडाल में भव्य रुप से गुरुपूर्णिमा महोत्सव होगा।
इसके बाद कड़वे प्रवचनों की श्रृंखला 23 जुलाई से 6 अगस्त तक संपन्न होगी। इस पांडाल कि विशेषता यही है कि 135 फीट चौडे़ इस पांडाल के बीच में कही भी कोई खंभा नहीं है। जर्मन हैंगर तकनीक से बने 135 फीट लम्बे और 180 फीट चौड़े इस पांडाल में काम आने वाले कई सामानों को विशेष रूप से जर्मनी से मंगाया गया है। पांडाल की ऊंचाई 45 फीट है। इस तरह का यह पहला पांडाल है।
तीन दिन, पचास कारीगर और बैठ सकेंगे 5 हजार लोग
तैयार हो रहा है पांडाल
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि आम तौर पर हमारे यहां पर बांस और बल्ली के पांडाल बनाए जाते हैं, लेकिन इस पांडाल को पूरी तरह एल्युमिनियम से बनाया गया है। यह पूरी तरह से वाटरप्रुफ पांडाल है, भारी बारिश, आंधी, तूफान में भी यह मजबुती से खड़ा रह सकता है।
इसे बनाने में जर्मन तकनीक का उपयोग हुआ है। जिसमें पांडाल के कपड़े पर एक खास तरह के द्रव का इस्तेमाल किया जाता है, जो आग को बढ़ने से रोकता है। इसमें अगर आग लगे तो वह फैलती नहीं है। इसमें कुलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। जिससे गर्मी श्रोताओं को परेशान नहीं करेगी।
दावा है कि इस तरह की रचना पूरे देश में पहली बार की जा रही है। इस पांडाल खड़ा करने के लिए बंगाल से 50 कारगिरों की टीम आई है। यह पांडाल मात्र 3 दिन में तैयार हो जाता है। इसमें एक साथ 5000 लोग बैठ सकते हैं।