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251 किलो के रोट के लिए चाहिए 24 घंटे की एेसी कड़ी मेहनत...

Tue, 11 Apr 2017 02:15 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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रोटा प्रसादी।
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हनुमान जयंती के अवसर पर हनुमान मंदिरों में प्रसादी के रूप में रोटा चढाने की परंपरा है। परमाणु नगरी पोकरण में बजरंग बली को 24 घंटे की अथक मेहनत के बाद 251 किलो का रोटा चढाया गया।

जानकारी के अनुसार हनुमान जयंती के अवसर पर मंगलवार को मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गय। पोकरण के सालमसागर स्थित हनुमान मंदिर में चढाया गया 251 किलो का रोटा आकर्षण का केन्द्र रहा। बजरंग बली को चढने वाले 251 किलो के रोट के लिए भक्तगणों को कडी मशक्कत करनी पडी।
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रोट बनाने वाले होते हैं खास लोग

रोटा प्रसादी
करीबन एक दिन तक रोट तैयार कर उसे सेकने के लिए अंगारों में रखा गया। जानकारी के अनुसार प्रतिवर्ष हनुमान जयंती के अवसर पर सालमसागर तालाब स्थित हनुमान मंदिर, बांकना हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में रोटे का प्रसाद चढाया जाता है। जिसके अंतर्गत विशेष कारीगरों की ओर से रोट तैयार किया जाता है। दो दिन पूर्व ही स्थानीय सालमसागर तालाब स्थित हनुमान मंदिर में रोट तैयार किया गया।
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570 किलो का होगा चूरमे का प्रसाद

रोटा प्रसादी
हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर चूरमे का प्रसाद तैयार किया गया। 251 किलो आटे को 140 किलो दूध में गूंथकर रोट तैयार किया गया। जिसे सूती कपड़े व बारदाना में लपेटकर 20 हजार कण्डों के अंगारे में रखा गया, जो मंगलवार को सुबह तक सिक कर तैयार हो गया तथा अंगारों से बाहर निकालकर उसका चूरमा तैयार किया गया। चूरमा बनाते समय इसमें 80 किलो शक्कर, 120 किलो घी, 25 किलो काजू, किशमिश, बादाम, दो किलो इलायची डाली भी डाली गइ। पूरे मिश्रण से करीब 570 किलो चूरमा तैयार हुआ। कस्बे सहित आस पास से गांवों से आने वाले भक्तों ने चूरमे की प्रसादी का आनंद उठाया। 
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