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घुसपैठ का ये तरीका आज भी बना हुआ है सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती

Tue, 10 Oct 2017 11:06 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
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सरहदों की हिफाजत में जुटी सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठियों को रोकने के लिए प्रतिदिन तारबंदी से लेकर आधुनिक तकनीक तक का सहारा ले रही है। लेकिन एक समस्या ऐसी है जिसका हल आज तक नहीं हो सका है। ये समस्या है शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस की।
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राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर से लगते सरहदी जिले में शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस का फायदा उठाकर लगातार घुसपैठ जारी है। हाल ही जैसलमेर के सम गांव से पकड़े गए घुसपैठिए हसन खान ने बताया कि वह करीब 27 वर्ष पूर्व शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस का फायदा उठाकर अपने रिश्तेदारों के पास पाकिस्तान चला गया था। वहां वह अमलकोट जिले में बिना पासपोर्ट के रहा।

हसन शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस का फायदा उठाकर कुछ माह पूर्व फिर जैसलमेर वापस लौट आया। इसके लिए उसने मात्र पांच हजार की रकम चुकाई और सरहद पर सक्रिय गिरोह के सदस्य उसे भारत पहुंचा गए।
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हसन ने सीमा के उस पास जाने और वापस आने के लिए दोनों बार शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस की मदद ली। हालांकि अब वह सुरक्षा एजेंसियों के कब्जे में है और उससे गहन पूछताछ जारी है।
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हवा में लटक जाती है या रेत में दब जाती है तारबंदी

फाइल फोटो।
दरअसल रेगिस्तान में तेज हवाओं के साथ रेत उड़ती है और रेत के टीले रातोंरात अपनी जगह बदल लेते है। जिसके कारण बॉर्डर पर तारबंदी कई स्थानों पर रेत के टीलों में दब जाती है या फिर तारबंदी के नीचे से रेत हट जाती है।

एेसे में घुसपैठिए रेत में दबने से तारबंदी के ऊपर होकर या नीचे से रेत हटने से हवा में लटकी तारबंदी के नीचे से सीमा पार कर जाते हैं। ऐसे ही स्थानों को सरहद पर सक्रिय गिरोह ने चिन्हित कर रखा है। जब सेंड ड्यूंस अपनी जगह बदलते हैं, तो ये लोग सरहद पार लोगों को भेजते हैं।

ये गतिविधि प्राकृतिक होने के कारण सुरक्षा एजेंसिंयों के लिए यह काफी चुनौती भरा कार्य है।
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