राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के चर्चित नमकीन व्यवसायी युवराज पाड्या हत्याकांड के अभियुक्तों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की ओर से सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश कैलाशचंद शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश मृतक के बडे भाई और हत्या के अभियुक्त संजय जैन, सोनू यादव, राजेन्द्र जैन व घनश्याम की आपराधिक याचिका को खारिज करते हुए दिए।
अपील में कहा गया कि अपीलार्थी की अपने भाई युवराज पाड्या से किसी तरह की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा नहीं थी। दोनों का अजब-गजब नमकीन का व्यवसाय अच्छा चल रहा था। वहीं मृतक की विधवा की ओर से कहा गया कि दोनों भाईयों में प्रतिस्पर्धा थी। युवराज की शिकायत पर ही अभियुक्त संजय की पत्नी को अवैध केरोसीन के भंडारण के मामले में पकड़ा गया था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आपराधिक अपील को खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
मामले के अनुसार 22 जून 2005 को सुबह करीब 11 बजे सेठी कॉलोनी के जैन मंदिर के पास अजब नमकीन के मालिक युवराज पाड्या की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस की ओर से विशेष टीम का गठन किया गया था। जिसने फरवरी 2006 में हत्याकांड को खोलते हुए मृतक के बडे भाई और गजब नमकीन के मालिक संजय जैन सहित राजेन्द्र जैन, सोनू यादव, घनश्याम और लवकुश लांबा को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला की संजय ने अपने छोटे भाई की हत्या व्यापारिक प्रतिस्पर्घा के चलते तीन लाख रुपए की सुपारी देकर करवाई थी। सती मामलों की विशेष अदालत ने 16 मार्च 2012 को चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं सरकारी गवाह बने आरोपी लवकुश लांबा को क्षमादान देते हुए रिहा कर दिया था।