देश के खनन विशेषज्ञों ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि किसी भी खनन के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एक ही बार में 50 साल के लिए स्वीकृति मिलनी चाहिए।
यह प्रस्ताव उदयपुर में चल रही राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय खनन सेमिनार में सर्वसम्मति से तैयार हुआ है। इस सेमिनार में राजस्थान के खान मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी सहित देश के खान महानियंत्रक रंजन सहाय व खान सचिव अरुण कुमार भी मौजूद रहे। इनकी मौजूदगी में तैयार हुए प्रस्तावों में विशेषज्ञों ने बजरी की अलग से खनन नीति बनाने व इसका विकल्प ढूंढने, लो ग्रेड व वेस्ट मिनरल का वेल्यू एडिशन कर उपयोग करने, संचालित खानों का नवीनीकरण करने, खनन
क्षेत्र में कौशल विकास पर फोकस करने, खनन क्षेत्र में पौधारोपण को बढ़ावा देने, खदानों के स्थानान्तरण पर टैक्स कम करने, आधुनिक साॅफ्टवेयर के इस्तेमाल से पर्यावरणीय पैरामीटर को आॅनलाइन मेंटेन करने की जरूरत जताई। ये प्रस्ताव प्रो. बी.बी धर ने पेश किए।
केंद्रीय खान सचिव अरुण कुमार ने कहा कि प्रकृति से मिनरल का दोहन करना जरूरी है क्योंकि यह राजस्व प्राप्त करने का बड़ा स्त्रोत है। हमें खनन एवं पर्यावरण के बीच सामंजस्य बिठाते हुए कार्य करना होगा, ताकि प्रकृति को विनाश से बचाया जा सके। इसके लिए खनन से प्राप्त होने वाली आय का कुछ हिस्सा सामाजिक उत्थान के कार्यों में खर्च करना चाहिए। कार्यक्रम समन्वयक डाॅ. एस.एस.राठौड़ ने सभी का अभिवादन किया।