राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष स्कीम में संविदा पर लगे याचिकाकर्ता कम्प्यूटर ऑपरेटर और फार्मासिस्ट को हटाने पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने प्रमुख चिकित्सा सचिव, मुख्य चिकित्साधिकारी, जयपुर और एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश महेन्द्र कुमार बैरवा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2009 से एसएमएस अस्पताल में संविदा पर कम्प्यूटर ऑपरेटर व फार्मासिस्ट के पद पर कार्य कर रहे हैं। गत 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं को पद से हटाकर इनका कार्य दूसरी योजना में लगे संविदाकर्मियों को दे दिया।
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने योजना खत्म नहीं की है। ऐसे में संविदा पर लगे कर्मचारियों को संविदा से लगे दूसरे कर्मचारियों से बदला नहीं जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को पूर्व निर्धारित वेतन भी नहीं दिया जा रहा है।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को हटाने पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।