राजस्थान हाईकोर्ट में शुक्रवार को नगरीय विकास विभाग की ओर से आदेश पेश कर कहा गया कि 27 जून 1999 के बाद एसटी व एससी की भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के संबंध में गत 24 मई को जारी सर्कुलर को वापस ले लिया गया है। सरकार की ओर से पेश आदेश को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान को निस्तारित कर दिया।
न्यायाधीश मनीष भंड़ारी की एकलपीठ ने यह आदेश अमरचंद की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान का निस्तारण करते हुए दिए। मामले में अनुसार पृथ्वीराज नगर योजना के तहत की गई भूमि अवाप्ति को याचिकाकर्ता ने चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 के तहत एससी या एसटी की भूमि
सामान्य वर्ग को आवंटित नहीं की जा सकती।
वहीं राज्य सरकार की ओर से नगरीय विकास विभाग की ओर से 24 मई को जारी सर्कुलर पेश कर कहा गया था कि 27 जून 1999 के बाद एससी, एसटी वर्ग की भूमि पर बसी कॉलोनियों का पट्टा जारी किया जा सकता है। इस पर अदालत ने 6 जुलाई 2017 को आदेश जारी कर 24 मई के सर्कुलर पर रोक लगा दी थी।