बीसीसीआई से संबधित किसी भी क्रिकेट संघ के चुनावों को लेकर इतनी चर्चा नहीं होती है जितनी की राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनावों पर नजर रखी जाती है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में भगौड़ा घोषित किए गए पूर्व आरसीए अध्यक्ष और आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के कारण राजस्थान क्रिकेट संघ सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहा है।
मोदी राज में राजस्थान क्रिकेट के दिन तो फिरे ही थे मगर उन्हीं के कारण ना मिटने वाले दाग भी लगे। लिहाजा राजस्थान को बीसीसीआई द्वारा निलंबन अब तक झेलना पड़ा। हालत ये है कि दो बार की लगातार रणजी चैंपियन राजस्थान को रणजी मैचों में भी बिना लोगो और नाम के उतरना पड़ रहा है। कुल मिलाकर यूं कहे तो राजस्थान क्रिकेट को लेकर हो रही राजनीति के बीच यदि किसी को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है तो वो है क्रिकेट और खिलाड़ियों को। आरसीए के बीसीसीआई द्वारा निलंबित होने के बाद से ही राजस्थान में लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आयोजन नहीं हुआ।
यहां तक की पर्यटन के क्षेत्र को भी इसका काफी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि आईपीएल मैचों के दौरान जयपुर में पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ करता था। निलंबन के कारण ही राजस्थान के खिलाड़ियों की अनदेखी भी कोई नई बात नहीं है और इसका मुख्य कारण रहा बीसीसीआई की सलेक्शन कमिटी में किसी पूर्व राजस्थानी खिलाड़ी का ना होना।
राजस्थान के एकमात्र इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम सवाई मानसिंह मैदान की हालत भी दिन ब दिन खराब होती जा रही है। स्टेडियम के विकास पर ना तो राज्य सरकार ने कभी ध्यान दिया और ना ही बीसीसीआई ने इसमें कोई रुचि दिखाई।
आरसीए चुनावों के नतीजे जो भी हो लेकिन देश के सबसे बड़े राज्य में देश का ही सबसे लोकप्रिय खेल अपनी दुर्दशा पर फिर से बदहाली के आंसू ना रोए यही खेल से जुड़ा हर एक खिलाड़ी और खेलप्रेमी दुआ कर रहे हैं।