अतिरिक्त जिला न्यायालय क्रम-4 ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को बीसीसीआई के खिलाफ दायर दावे को वापस लेने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने आरसीए के कार्यकारी सचिव महेन्द्र नाहर की ओर से दायर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नए संविधान के तहत महेन्द्र नाहर को आरसीए का सक्षम प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। ऐसे में उन्हें दावे को वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले के अनुसार बीसीसीआई ने निर्णय लिया था कि ललित मोदी जिस भी संगठन में पदाधिकारी रहेंगे, उस संगठन को बीसीबीआई अपनी सम्बद्धता नहीं देगा। मोदी के आरसीए अध्यक्ष बनने के बाद बीसीसीआई ने आरसीए की सम्बद्धता को निलंबित कर दिया था। इसे आरसीए की ओर से दावा दायर कर चुनौती दी गई।
वहीं गत दिनों सीपी जोशी के अध्यक्ष बनने के बाद आरसीए के सचिव आरएस नांदू को पद से हटाकर संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर को कार्यकारी सचिव बनाया गया। नाहर की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि नई कार्यकारिणी बनने के कारण दावा वापस लेने की अनुमति दी जाए। जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे आरसीए के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं कहे जा सकते।