चांद का दीदार होते ही रहमतों और बरकतों का महीना रमजान शुरू हो गया है। इसके साथ ही जयपुर शहर के बाजारों में खरीददारों से बाजार आबाद होने लगे हैं। हालांकि, तेज गर्मी को देखते हुए लोग शाम के समय ही बाजारों में खरीददरी करते ज्यादा दिख रहे हैं। खासकर मुस्लिम बाहुल्य बाजारों में खजूर, टोपी और इत्र की मांग बढ़ गई है।
दरअसल, रमजान के पवित्र महीने को ध्यान में रखते हुए जयपुर शहर के बाजारों में भी खास वस्तुओं की मांग बढ़ गई हैं। इनमें टोपी, इत्र, जा—नमाज, शीरमाल और सुरमे की खरीददारी मुख्य है। आलम यह है कि इस बार परकोटे के रामगंज बाजार, घाटगेट, भट्टा बस्ती, चांदपोल और जौहरी बाजार में तीस रुपए से लेकर पांच सौ रुपए की टोपियां मिल रही हैं। इनमें फैंसी, वेल्वेट, तुर्की, बरकाती, आफरा और रामपुरी टोपियां शामिल हैं। वहीं, मस्जिदों में इंतजामों की बात करें तो पहले से ही नमाजियों के लिए जा—नमाजों का इंतजाम किया गया है ताकि किसी भी नमाजी को किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो। मुस्लिम समाज के लोग भी मस्जिदों में जा—नमाज खरीदकर रखवा रहे हैं। बाजारों में तुर्की, सिलाईवाली, जेकार्ड, कॉटन, दरी, कॉरपेट, बट, सिल्क स्पेशल और जरी की कई तरह की वैरायटी उपलब्ध है।
बताया जाता है कि रमजान में इत्र और सूरमा लगाना, नए कपड़े पहनने का काफी शौक रहता है। इसके मद्देनजर 40 से 100 रुपए में तीन से पांच ग्राम वजन में कई किस्मों का सुरमा बिक रहा है। दुकानदारों के अनुसार ममीरा खास, खोजाती, सदफ और गुलाब का सुरमा ज्यादा पसंद किया जाता है।
बाजार में खजूर की भी कई तरह के उपलब्ध हैं। इममें मरीयमी, अजवा खजूर, कलमी, सफवी, अल रोजा, फरद, अलिफ रेहान, याकूत, अलमदीना, कीमिया, बूमन, बट, इनसमूर, किम तमूर, फेलकॉन, डेसर्ट किंग, मस्कट, अरेबियन, सीडलेस आदि प्रकार के खजूर बाजार में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत बाजार में 170 रुपए से लेकर 2500 सौ रुपए किलो तक है।
दूसरी ओर तेज गर्मी को देखते हुए मस्जिदों में पानी के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। हालांकि, लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे ज्यादा पानी को बर्बाद नहीं करें।