बांसवाड़ा में खेत में छिपे लेपर्ड ने पत्थर मारने पर दो युवकों को घायल किया।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
बांसवाड़ा के कुशलगढ़ में कांकनवाणी गांव में एक खेत मे लेपर्ड आने से किसानों में हड़कंप मच गया। लेपर्ड के गुर्राने की आवाजें आईं, तो ग्रामीण उसे ढू़ढ़ने जुट गए और भगाने की कोशिश करने लगे। कुछ लोगों ने उस पर पत्थर फेंके, तभी अचानक में पलटवार करते हुए लेपर्ड ने हमला बोल दिया और पंजा मारकर एक किसान को घायल कर दिया। पत्थरबाजी के बाद हुका मंगलिया और खूमचंद मानसिंह दोनों डंडा लेकर जब लेपर्ड की ओर दौड़े, तो उसने हमला कर दिया। लेपर्ड का हमला होते ही वह दोनों नीचे गिर गए। पीठ और पैरों पर लेपर्ड ने पंजे मार दिए। दोनों को ईलाज के लिए कुशलगढ़ के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। करीब दो घंटे तक लेपर्ड को पकड़ने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान तमाशबीनों की भीड़ भी लग गई। देर शाम लेपर्ड खेतों में खड़ी फसलों के बीच से कहीं छिपकर निकल गया। लेकिन ग्रामीण इस घटना के बाद से डरे हुए हैं।
लक्ष्मण मुनिया के मक्का के खेत में दिखा लेपर्ड
लेपर्ड मुनिया फला निवासी लक्ष्मण मुनिया के मक्का के खेत में देखा गया। यहां सिंचाई करने जुटे वार्ड पंच लक्ष्मण ने मक्का की फसल में पैंथर देखा, तो गांव के लोगों को बताया। फिर भीड़ जुटी और शोरशराबा शुरू हो गया। इत्तला पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हो-हल्ला कर रहे लोगों को पीछे हटाने की कोशिश की, लेकिन लोग हटे नहीं। इस बीच क्षेत्रीय वन अधिकारी और रेंजर कुशलगढ़ गिरीश लबाना भी मौके पर पहुंच गए। लबाना ने बताया कि मौके से हालात उच्चाधिकारियों को बताए गए, तो बांसवाड़ा से ट्रेक्यूलाइलजर गन लिए विष्णुसिंह और पिंजरे के साथ गश्ती दल के जवान भी पहुंचे। तब तक ग्रामीणों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो रहा था।
पथराव से बिफर गया लेपर्ड और किया हमला
टोकने के बावजूद दोपहर करीब 12 बजे नशे में बताए गए दो जनों के पथराव से पैंथर बिफर गया। वह मक्का के खेत से निकलकर एक के बाद एक, दो जनों को जख्मी करते हुए वापस कपास के खेत से जा घुसा । हालांकि आगे फिर भीड़ दिखा दी, तो लेपर्ड वापसी कर खेत में ही दुबक गया। दोनों घायलों को कुशलगढ़ सीएचसी से प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को छुट्टी दे दी गई है। शाम करीब पौने 7 बजे अचानक लेपर्ड फसल से निककर रामगढ़ वन क्षेत्र की ओर भाग गया है। वन विभाग अधिकारी गिरीश लबाना के नेतृत्व में टीम लेपर्ड की तलाश कर रही है। उसके मूवमेंट ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण भी हाथों में डंडे लेकर लगातार निगरानी कर रहे हैं। सम्भावना यह है कि देर शाम अंधेरा होने के बाद लेपर्ड नजर बचाकर जंगल की ओर भाग निकला होगा।
6000 हेक्टेयर की टेरिटरी, पहली दफा दिखा खेत में
कांकनवाणी के जिस खेत में घटना हुई वह कुशलगढ़ रेंज के रामगढ़ वन खंड से मात्र 400 मीटर दूर है। क्षेत्रीय वन अधिकारी लबाना के अनुसार करीब 6000 हेक्टेयर में फैले इस वन क्षेत्र के खत्म होने के बाद नाला है, जहां अक्सर मरे हुए मवेशी फेंकने से गीदड़, लोमडियां उन्हें खाने के लिए आते हैं। संभवत: शिकार की तलाश में लेपर्ड रात को नाले की तरफ आया और सुबह जल्दी वापसी नहीं कर पाया। भोर होने पर वह कपास के खेत में ही दुबक गया और ग्रामीणों की नजर पडऩे से दिक्कत शुरू हुई। इस क्षेत्र में पैंथर के हमलावर होने की यह पहली घटना रही।