इस मामले की सुनवाई करीब सवा तीन साल चली और इस दौरान 110 लोगों की गवाही हुई। सजा सुनाए जाने के बाद रुद्राक्ष के माता-पिता ने कोर्ट परिसर में मीडिया से कहा कि उन्हें न्याय मिला है। हत्यारे को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, ताकि वे उन्हें बड़ा सबक मिले।
गौरतलब है कि 9 अक्टूबर 2014 की रात को मासूम रुद्राक्ष का मुख्य आरोपी अंकुर पाड़िया ने तलवंडी के हनुमान पार्क से अपहरण किया था। वह उसे चॉकलेट दिलाने के बहाने पार्क से उठाकर ले गया।
उसके बाद वो उसे लेकर जगह-जगह घूमता रहा और परिजनों से दो करोड़ रुपए की फिरौती मांगी।
इस अपरहरण कांड के बाद पुलिस की सक्रियता के बाद अंकुर काफी घबरा गया और उसने रुद्राक्ष को मौत के घाट उतार दिया।
इसके बाद आरोपी ने रुद्राक्ष की हत्या कर उसकी लाश अगले दिन 10 अक्टूबर को नांता से जाखमुंड की तरफ जा रही नहर में फेंक दी। अंकुर पाड़िया व्यापारी है और कर्ज में डूबा हुआ था। लग्जरी लाइफ जीने के चक्कर में अंकुर पाड़िया ने इस वारदात को अंजाम दिया।
इसके बाद वे कई दिन तक कोटा में छिपा रहा और पुलिस को गुमराह करता रहा। पुलिस ने हाईटेक अंदाज में वारदात का खुलासा करते हुए अंकुर पाड़िया को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में उसके भाई अनूप, साथी महावीर और करणजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया।