लॉ आॅफ ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत पर एक शिक्षा मंत्री के बयान से जहां उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है वहीं एक प्रोफेसर ने शिक्षा मंत्री के बयान को तर्क के साथ पेश किया है। बात की जा रही है राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी की जहां वो एक बार फिर से विवादों में आ गए हैं। इस बार उन्होनें दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत देने वाले न्यूटन को इसका आविष्कारक ना बताते हुए बल्कि भारतीय गणितज्ञ और ज्योतिष ब्रहृम्गुप्त द्वितिय को इसका प्रणेता बताया है।
जहां देवनानी के इस बयान की चौतरफा आलोचना हो रही है वहीं राजस्थान विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष के.जी शर्मा ने देवनानी की पीठ थपथपाते हुए कहा है गुरुत्वाकर्षण के बारे में सबसे पहले ब्रहृमगुप्त द्वितिय द्वारा 628 ईसवी में लिखी गई किताब 'ब्रहृमस्फूटसिद्धांता' में बताया जा चुका है।
उन्होनें किताब से ही संस्कृत में लिखे एक सूत्र का अनुवाद करते हुए बताया कि जिस तरह पानी का स्वभाव निरंतर बहना है ठीक उसी तरह पृथ्वी का भी यहीं स्वभाव है की वो हर चीज को अपनी ओर खींचती है। प्रोफेसर केजी शर्मा ने कहा है कि ब्रहृमगुप्त की गुरुत्वाकर्षण को लेकर जो सूत्र दिए थे वो सब बाद में एक और ज्योतिष भास्कर द्वितिय ने 1150 ईसवी में अपनी किताब 'सूर्य सिद्धांत' में दे चुके हैं। इससे ये साबित होता है कि धरती पर गुरुत्वाकर्षण के बारे में सबसे पहले भारत ने ही दुनिया को समझाया था।