पति-पत्नी के मतभेदों के बीच उनके दस साल के बच्चे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हर दिन पिता को उसके साथ आठ घंटे बिताने की गुहार की है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस संबंध में कोई कानूनी प्रावधान नहीं होने के चलते याचिका को खारिज भी कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इस मांग को देखते हुए विधायिका को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में संशोधन के लिए कदम उठाना चाहिए। न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश सत्यम खंडेलवाल के अपनी मां के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दस साल के बच्चे को अपने पिता के साथ समय बिताने के साथ-साथ पिता से लाड-प्यार भी पाने का अधिकार है। समाज की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे औचित्यहीन भी नहीं कहा जा सकता। पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद या मनमुटाव के कारण वैवाहिक विवाद भले ही पैदा हो रहे हों, लेकिन इसकी सीधी हानि ऐसे मासूमों को झेलनी पड़ती है, जिनका इस विवाद में कोई भूमिका नहीं रहती।