राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद अवैध परिवहन में लगी बसों पर कार्रवाई नहीं करने पर परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल को 13 सितंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आयुक्त से पूछा है कि क्यों न उन्हें अवमानना के लिए दंडित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने अवैध बस संचालन नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र भी पेश करने को कहा है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेन्द्र कुमार पारीक की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने गत वर्ष 17 सितंबर को आदेश जारी कर परमिट शर्तों का उल्लंघन कर जयपुर-सीकर-बीकानेर राजमार्ग पर चलने वाली बसों पर कार्रवाई करने को कहा था। इसके बावजूद भी विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में कहा गया कि वाहन मालिकों ने पर्यटन वाहन का लाईसेंस लेकर बसों को यात्री वाहन के लिए लगा दिया है। इसके अलावा लोक परिवहन योजना के खिलाफ इन बसों का संचालन किया जा रहा है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने परिवहन आयुक्त को तलब कर स्पष्टीकरण पेश करने के आदेश दिए हैं।