जोधपुर संभाग में लावारिस श्वानों को लेकर बनाए गए नियमों की पालना नहीं करने और उनके साथ किए जा रहे क्रूरता के व्यवहार पर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में जनहित याचिका पेश कि गई।
राजस्थान हाईकोर्ट सीजे प्रदीप नन्द्राजोग व जस्टिस आरएस झाला की खंडपीठ में याचिकाकर्ता श्वेता जैन की ओर से अधिवक्ता राजवेन्द्र सारस्वत ने जनहित याचिका पेश की। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, एनीमल वेलफेयर बोर्ड, नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ने बताया कि आवारा श्वानों को लेकर साल 2001 में एबीसी रूल्स बनाए गए थे, जिसमें आवारा श्वानों की नसबंदी करने के नियम बनाए थें।
नियमों की पालना करने की बजाय श्वानों को पकड़कर सूरसागर स्थित बाड़े में ले जाकर छोड़ दिया जाता है, जहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उनकी मौत भी हो जाती है। जबकि नियम केवल इनकी नसबंदी करके छोड़ने के हैं जिससे की इनकी संख्या ना बढ़े। हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब तलब किया है।